बिहार चुनाव: किसके हिस्से आएगी पीरपैंती की मिठास और किसे मिलेगी मिर्च

गुड़ की मिठास और तीखी मिर्च के लिए पीरपैंती विधानसभा चर्चित है। उद्योग की पहचान वाले इस विधानसभा में अब टूटी सड़के, धूल के गुबार दिखते हैं।

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भागलपुर: बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित भागलपुर जिले का पीरपैंती विधानसभा (सुरक्षित) क्षेत्र सीपीआई का गढ़ माना जाता था, लेकिन 2005 के चुनाव के बाद वामदल का गढ़ ढहता चला गया। पीरपैंती विधानसभा सीट की चर्चा स्वर्गीय अंबिका प्रसाद के बिना अधूरी मानी जाएगी। 49 साल तक इनके इर्द-गिर्द पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र की राजनीति घूमती रही। वह इस क्षेत्र से छह बार निर्वाचत हुए तो छह बार दूसरे स्थान पर रहे। 2005 के अक्टूबर के चुनाव में तीसरे स्थान पर आने के बाद पार्टी का जनाधार सिमटता चला गया। 
भागलपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पीरपैंती विधानसभा झारखंड के साहिबगंज और गोड्डा से सटा हुआ है। यह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र माना जाता है। यादव और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी है। 1957 में हुए चुनाव में यहां कांग्रेस के रामजन्म महतो विधायक चुने गए थे। 2020 में भाजपा के ललन कुमार इस सीट से विधायक निर्वाचित हुए। 

राजद और भाजपा के बीच होता कड़ा मुकाबला
पीरपैंती विधानसभा में भाजपा और राजद के बीच होता कड़ा मुकाबला। 2025 के विस चुनाव में इस सीट पर राजद की कब्जा जमाने की है। वर्तमान में ललन कुमार यहां से विधायक है। बीजेपी की तरफ से अमन कुमार ने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी लेकिन पिछले चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर अमन निर्दलीय लड़े थे। इस बार अपनी दावेदारी पेश करने के मकसद से उन्होंने जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।

2000 में राजद का झंडा पहली बार गड़ा
इस विधानसभा में 3.77 लाख से अधिक मतदाता हैं। 2000 के चुनाव में इस सीट पर राजद का खाता खुला था। आरजेडी के प्रत्याशी शोभाकांत मंडल यहां से तीन बार जीते। 2005 में दो बार चुनाव हुआ और दोनों बार राजद प्रत्याशी के तौर पर उन्हें जीत मिली।

भाजपा को 2010 में पहली बार जीत मिली 
2010 में भाजपा ने इस सीट पर पहली बार जीत स्वाद चखा और अमन कुमार विधायक बने थे। 2015 के चुनाव में भाजपा ने अमन कुमार का टिकट काटकर ललन कुमार को प्रत्याशी बनाया था। जिसके बाद राजद ने भाजपा को पटखनी दे दी और आरजेडी से रामविलास पासवान विधायक बने। इस चुनाव में रामविलास को 80 हजार ललन कुमार को 75 हजार के करीब वोट मिले थे।

इस बार क्या है समीकरण
पीरपैंती सीट से इस होने वाले वस चुनाव में भाजपा किस उम्मीदवार को दांव लगाएगी। इसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। पार्टी अमन कुमार को प्रत्याशी बनाएगी या फिर से ललन को चुनावी मैदान में उतारेगी या फिर कोई किसी नए चेहरे से दांव लगाएगी। इसको लेकर चर्चा तेज है। वहीं दूसरी ओर आरजेडी की तरफ से रामविलास पासवान के अलावा भी कई संभावित उम्मीदवारों की चर्चा है। वहीं वामदल की भी नजर इस सीट पर है।

प्रमुख मुद्दे
पीरपैंती में बिजली उत्पादन के लिए एक संयंत्र लगाया जाना था। हाल में इसके लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हुआ है। हालांकि, मुआवजा को लेकर पेंच फंसा है जिसके चलते निर्माण कार्य बाधित है। हालात यह है कि पावर प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया है।

कटाव का समाधान नहीं
बटेश्वर स्थान से टपुआ तक कटाव जारी है। कटाव के चलते रानी दियारा इलाके के लोग तीन बार विस्थापित हो चुके हैं। इस बार फिर पूरा गांव गंगा में विलीन हो चुका है।

बेरोजगारी बढ़ी
पीरपैंती कोलडंप में कोयला ढुलाई और रैक लोडिंग बंद है। कोयला ढुलाई में दो सौ से ढाई सौ तक हाइवा चलती थी। जिसमें एक हजार चालक व खलासी सहित करीब दो सौ गाड़ी के मालिक का परिवार आश्रित थे।

प्रदूषण से ग्रामीण हो रहे बीमार
एनएच -80 पर उड़ती धूल से होने वाले प्रदूषण से सड़क किनारे बसे लोग बीमार होने लगे है। पत्थर ढुलाई के दौरान वाहनों उड़ने वाली धूल से लोगों के फेकड़े में घुल रहा है। किसान भी धूल से परेशान है। इससे उनकी फसल की पैदावार प्रभावित हो रही है।

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