बिहार चुनाव: कौन फुलवारीशरीफ का असली दावेदार, तय करेंगे नीतीश कुमार

एक सीट से ही पार्टी के दो दावेदार, चुनाव के ऐलान से पहले दोनों सियासी मैदान में पसीना बहा रहे हैं। कोशिश वोटर को लामबंद करने की है। बात पटना के फुलवारी शरीफ विधानसभा की है। और पार्टी के नेता जदयू से हैं। अब इसका फैसला सीएम नीतीश कुमार करेंगे कि असली उम्मीदवार कौन होगा।

Share This Article:

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले जदयू के दो वरिष्ठ नेता फुलवारीशरीफ सीट पर उतर गए हैं। यह बात अलहदा है कि पार्टी ने अभी किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया है। इसमें एक पिछले सात चुनाव में छह बार जीत दर्ज करने वाले श्याम रजक हैं। हाल में ही उन्होंने राजद से जदयू में वापसी की। यह सीट से प्रबल दावेदार हैं। जबकि इसी पार्टी से 2020 के उम्मीदवार रहे अरुण मांझी ने भी कमर कस ली है। पार्टी का एक खेमा यहां से अरुण मांझी को उम्मीदवार मान रहा है।
पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ताओं का कहना है कि श्याम रजक को जदयू से आगामी विधानसभा चुनाव में फुलवारीशरीफ विधानसभा से उम्मीदवार बनाना चाहिए। वही, पूर्व विधायक अरुण मांझी के समर्थकों का कहना है कि फुलवारीशरीफ विधानसभा में अरुण मांझी के अलावा पार्टी किसी और उम्मीदवार नहीं बना सकती है।
2010 विधानसभा चुनाव में अरुण मांझी मसौढ़ी विधानसभा से जदयू के विधायक रह चुके है।मसौढ़ी और फुलवारीशरीफ विधानसभा सटी होने से अरुण मांझी की पकड़ दोनों सीटों पर है। अरुण मांझी 2025 चुनाव को लेकर विधानसभा में घूम रहे हैं। इलाके में इनके पोस्टर भी दिख रहे हैं।

असमंजस में कार्यकर्ता और जनता
जदयू के दोनों नेताओं की सक्रियता से स्थानीय कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। पार्टी से अभी तक किसी नेता को हरी झंडी नहीं मिली है। हालांकि, चर्चा यह है कि दो वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी पर किसी एक पर मोहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही लगाएंगे।

जानिए जातीय समीकरण
फुलवारीशरीफ विधानसभा सीट सुरक्षित सीट है। यहां के जातीय समीकरण में रविदास, पासवान के साथ ही यादव और मुस्लिम वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इस सीट पर अब तक सबसे ज्यादा मतदान 63.32 प्रतिशत साल 2000 में हुआ था। इस दौरान पुरुषों ने 73.7 और महिलाओं ने 50.95 प्रतिशत मतदान किया था।

1977 में बनी थी सीट
पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह फुलवारीशरीफ विधानसभा सीट 1977 में बनी थी। तब सबसे पहले जनता पार्टी के उम्मीदवार रहे रामप्रीत पासवान ने जीत का परचम लहराया था। फिर, मैदान में कांग्रेस के नेता संजीव प्रसाद टोनी ने लगातार तीन बार यह सीट जीतकर कांग्रेस के झोली में डाली। इसके बाद 1995 जदयू ने इस सीट पर श्याम रजक के रूप में इस सीट कब्जा किया। लेकिन सियासी उलटफेर के बाद जदयू के श्याम रजक राजद में शामिल हो गये। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2000 का चुनाव राजद के सिंबल से लड़ा और जीत दर्ज की।
2009 के उपचुनाव में राजद खेमे से निकलकर श्याम रजक एक बार फिर जदयू में शामिल हुए थे। लेकिन उपचुनाव में श्याम रजक को पटखनी देकर राजद के उम्मीदवार रहे उदय कुमार निर्वाचित हुए। इसके 2010 में विधानसभा चुनाव में जदयू से श्याम रजक ने जीतकर फिर से क्षेत्र की कमान संभाली। 2020 विधानसभा चुनाव में यह सीट महागठबंधन के माले खेमे में गयी। दूसरी तरफ, उनका मुकाबला जदयू से था। इस चुनाव में माले उम्मीदवार गोपाल रविदास ने दूसरे नंबर पर रहे जदयू उम्मीदवार अरुण मांझी पटखनी दे दी।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.