डीएचएस ब्यूरो,
नई दिल्ली, 8 जनवरी। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली, जो पिछले चार महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स 780.18 अंक गिरकर 84,180.96 पर बंद हुआ, जबकि व्यापक निफ्टी 50 1.01% टूटकर 25,876.85 पर बंद हुआ। इस एक दिन की गिरावट ने निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की कमी कर दी।
बाजार के सभी 16 प्रमुख सेक्टर्स में नुकसान हुआ, जिसमें छोटे और मिडकैप शेयर 2% तक लुढ़क गए। गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500% तक के टैरिफ़ लगाने की आशंका है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। जनवरी माह में विदेशी निवेशकों ने अब तक $900 मिलियन के शेयर बेचे हैं, जबकि 2025 में विदेशी निकासी $19 बिलियन तक पहुँच चुकी थी।
सबसे अधिक प्रभावित सेक्टरों में मेटल्स 3.4%, तेल एवं गैस 2.8%, और आईटी 2% की गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, पर्ल ग्लोबल, अवंती फीड्स, एपेक्स फ्रोजन, एल एंड टी और बीएचईएल के शेयर नीचे आए। विश्लेषकों का कहना है कि बाजार वैश्विक अनिश्चितता और भारत-अमेरिका व्यापार तनाव के चलते नकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है।
इसके अलावा, वित्त मंत्रालय द्वारा सरकारी ठेकों के लिए चीनी कंपनियों पर पांच साल पुरानी पाबंदी हटाने का प्रस्ताव भी बाजार की अस्थिरता में इजाफा कर रहा है। कुल मिलाकर, टैरिफ़ और विदेशी निवेश की निकासी को लेकर निवेशक सतर्क बने हुए हैं और बाजार पर दबाव जारी है।



