नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को पीतमपुरा (शकूर बस्ती) स्थित रामलीला ग्राउंड के पास हुए विवाद और कथित तोड़फोड़ मामले को लेकर रानी बाग थाने में एसीपी मंगोलपुरी मुरारी लाल से मुलाकात कर विधायक कर्नैल सिंह के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
संगठन अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के निर्देश पर महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि विधायक द्वारा दिए गए बयान और गतिविधियां सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली हैं।
बयान तनाव पैदा कर रहा है
जमीयत ने दावा किया कि जिस ढांचे को मस्जिद या मदरसे का हिस्सा बताकर गिराने की बात कही गई, वह पूरी तरह भ्रामक है। संगठन के अनुसार संबंधित ढांचा न तो मस्जिद का हिस्सा था और न ही मदरसे का। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि पूरे मामले को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों को वीडियो रिकॉर्डिंग, मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट समेत कई साक्ष्य भी सौंपे। ज्ञापन में कहा गया कि विधायक कर्नैल सिंह ने कथित तौर पर भड़काऊ बयान दिए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और क्षेत्र में तनाव का माहौल बना।
इन धाराओं में दर्ज किया मुकदमा
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दिल्ली पुलिस से विधायक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153A, 153B, 295A और 505 समेत अन्य संबंधित धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। साथ ही गिराए गए ढांचे की निष्पक्ष जांच कराने और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने की अपील भी की गई।
संगठन ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।प्रतिनिधिमंडल में मौलाना आफताब आलम सिद्दीकी, मौलाना मुफ्ती खलील कासमी, कारी मोहम्मद आरिफ कासमी, हाफिज मोहम्मद यूसुफ अल-आजमी, मुफ्ती ज़ाकिर हुसैन कासमी, मौलाना जमशेद और डॉ. मोहम्मद यूसुफ समेत कई स्थानीय जिम्मेदार मौजूद रहे।



