उम्र नहीं, जज्बा मायने रखता है! 82 में ग्रेजुएशन कर बनीं प्रेरणा

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हरि वर्मा,

कुछ सीखने और सपने साकार करने की कोई उम्र नहीं होती. यह मानना है बिली जीन विंगका 65 साल पहले 1961 में बिली ने पढ़ाई छोड़ कर टेनिस को करियर बनाया। पहली पारी में उन्होंने टेनिस के 39 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते। अब 82 साल की उम्र में उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई छूट जाने की टीस को सीख के सपने से दूसरी पारी यानी 82 साल की उम्र में साकार कर विंग ने उस मिथ को भी तोड़ दिया कि खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब,

पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नबाव

दरअसल, दुनिया में बुजुर्ग (60 साल से अधिक आयु वर्ग के लोग) अब पहले से अधिक स्वस्थ, धनी और जीवन के प्रति उत्साही दिख रहे हैं । बुजुर्गों में ऊर्जा का संचार बढ़ा है । दीर्घायु हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जीवनशैली के चलते दुनिया भर के बुजुर्गों के जीने की औसत उम्र बढ़ी है। पुरूषों की औसत उम्र 70-72 साल तो महिलाओं की 73-74 साल हुई है। बुजुर्गों के दीर्घायु होने के साथ-साथ भारत में बाल मृत्यु दर में भी कमी आई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक पांच साल की उम्र तक बाल मृत्यु दर का आंकड़ा प्रति हजार 27 है । भारत में पिछले तीन दशक में बाल मृत्यु दर में करीब 78 फीसदी तक की कमी आई है। यही कारण है कि भारत आज दुनिया का सबसे युवा लोकतांत्रिक देश भी है। यहां की 65 फीसदी आबादी युवा है जबकि 60 साल की आयु से अधिक के बुजुर्ग करीब 11 फीसदी हैं।

उम्र, अनुभव व काबिलियत

आमतौर पर बुजुर्गों को घर-परिवार-समाज में खारिज कर दिया जाता है । ऐसे में बुजुर्गों के पास अस्तित्व का संकट बढ़ा है। इसके बाद भी दुनिया में बुजुर्गों की संपन्नता और खुशहाली का ग्राफ बढ़ा है । युवाओं की तुलना में संपन्न और खुशहाल बुजुर्ग ज्यादा हैं । करियर और महत्वकांक्षा के चक्कर में युवा जल्दी अवसाद के शिकार हो रहे हैं। युवाओं को इनसे उबरना होगा ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 पार हैं । संघ प्रमुख मोहन भागवत भी। मोदी और भागवत की सेवानिवृत्ति को लेकर चर्चाएं छिड़ती रही हैं। दोनों ने साफ कर दिया है कि यदि उन्हें संघ या पार्टी जिम्मेदारी से मुक्त कर दे तो अलग बात है वरना वे सक्रिय रहेंगे। दोनों की अपने-अपने क्षेत्र में सक्रियता साफ झलकती भी है।

इसके बावजूद संयोग है या प्रयोग लेकिन भारतीय जनता पार्टी की बागडोर युवा कंधे नवीन पर है, वहीं मार्गदर्शक मंडल में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी भी शुमार हैं । भाजपा को 2 से यहां तक लाने में इन मार्गदर्शकों की भूमिका उल्लेखनीय है। रिकॉर्ड सीएम बने रहने के बाद एनडीए सहयोगी नीतीश कुमार भी दूसरी पारी में अब राज्यसभा में पहुंच चुके हैं। सियासत और संगठन की बात छोड़ भी दें तो देश में सेवानिवृत्ति को लेकर एकरुपता नहीं है। केंद्र और ज्यादातर राज्यों की सेवाओं में सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा करीब 60 साल है।


न्यायपालिका या शैक्षिक सेवाओं में यह सीमा 65 साल है। निजी क्षेत्रों में 58 से 60 साल। सशस्त्र बलों में 54-60 साल। भारत में करीब 12 फीसदी कार्यबल को ही औपचारिक पेंशन योजना का लाभ मिल पाता है।

मोदी सरकार के आने के बाद अनुभवों को तरजीह मिली। लेटरल एंट्री के जरिये विशेषज्ञों और सलाहकारों की नियुक्तियां शुरू हुईं। नीति आयोग से लेकर विभिन्न मंत्रालयों में करीब 63 नियुक्तियां संयुक्त सचिव, उपसचिव, सलाहकारों के पदों पर हुईं। सेवानिवृत आईएएस को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई। एस जयशंकर जब विदेश सेवा से निवृत्त हुए तो 2019 में मोदी कैबिनेट का हिस्सा बने और तब से विदेश मंत्री हैं। जयशंकर ने भी सियासत में पिछले दरवाजे (राज्यसभा) से ही कदम रखा । लेटरल एंट्री को विरोधियों ने पिछले दरवाजे से अपने (संघ-भाजपा) लोगों की भर्ती मुहिम बताकर आरक्षण को लेकर सवाल उठाया। उसके बाद से लेटरल भर्तियां भी बंद हैं।

बुजर्ग बनाम जेन जी

परीक्षा पे चर्चा हो या फर्स्ट टाइम वोटर, मोदी का फोकस युवा-महिला शक्ति पर ज्यादा रहता है। पहली बार वोट डालने वालों की पसंद मोदी हैं । भारत दु‌निया का सबसे लोकतांत्रिक युवा देश है। यहां की ताकत युवा हैं। हालांकि युवाओं की आवाज बनने की कोशिश में हर बार विपक्ष को मुंह की खानी पड़ी है। कई बार तो सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी टिप्पणियों में नेपाल, बांग्लादेश या मेडागास्कट के जेन जी के तख्तापलट की घटनाओं का जिक्र किया है। तकनीक और विकास के दौर में आज के युवाओं से ज्यादा उम्मीदें हैं । युवा इस कसौटी पर खरे उतर रहे हैं।

जरूरत है अनुभव (बुजुर्ग) और कौशल (युवा) के संगम की। इसके बदौलत कामयाबी की नई कहानी गढ़ी जा रही है, वह भी तब जब दूसरी पारी में नित नये कामयाब चेहरे सामने आ रहे हैं। डर ग्रैटन और एंड्र्यु स्कॉट ने अपनी पुस्तक 100 ईयर लाइफ में लिखा भी है-आपका जीवन जितना लंबा होगा, पहचान उतनी ही अधिक होगी। अमिताभ का अ.. में यशवंत व्यास लिखते हैं कि जब कुली की शूटिंग के दौरान महानायक अमिताभ चोटिल हुए तो उनके प्रशंसकों ने चिंता जताई-अमिताभ अब क्या करेंगे लेकिन थोड़े समय बाद ही अभिताभ उठे और हॉट शीट पर फिर से बैठ गए। लाइट, कैमरा व एक्शन का सिलसिला जारी है। निरंतर सक्रियता ही उनकी सफलता व सेहत का राज भी है। ऐसे में बचपन और बुजुर्गियत के बीच संतुलन बनाए रखते हुए न रुकने, न थमने वालों के लब ही हमेशा गुनगुना सकते हैं, ना उम्र की सीमाहो, ना जन्म का हो बंधन….।

Shivangi Shukla

Shivangi.shukla95512@gmail.com

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