नई दिल्ली। भारतीय राजनीति का मंच न केवल विचारधाराओं का मिलन स्थल है, बल्कि यह नेताओं के प्रभावशाली व्यक्तित्व का भी प्रदर्शन क्षेत्र रहा है। राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम के एक विशेष विश्लेषण के अनुसार, देश के कई कद्दावर नेताओं की ‘भारी-भरकम कद-काठी’ केवल उनके शारीरिक भार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके राजनीतिक कद, जनता के भरोसे और निर्णय लेने की क्षमता का भी परिचायक रही है
अटल और पवार:
राजनीति के दो शिखर पुरुष लेख में महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार का विशेष उल्लेख है। उनकी मजबूत उपस्थिति और जोशीली कार्यशैली ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का स्तंभ बनाया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व और उनकी ओजस्वी वाणी ने यह सिद्ध किया कि एक मजबूत शारीरिक संरचना के पीछे विचारों की कितनी गहराई हो सकती है।
विकास और संगठन के ध्वजवाहक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर विश्लेषण कहता है कि उनकी भारी-भरकम कद-काठी उनके संकल्प की दृढ़ता को दर्शाती है। देश भर में बिछाया गया आधुनिक हाईवे का जाल उनके इसी दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। दूसरी ओर, आधुनिक राजनीति के ‘लौह पुरुष’ माने जाने वाले अमित शाह की संगठनात्मक क्षमता और उनके साहसिक निर्णय (जैसे अनुच्छेद 370) उनकी कद्दावर छवि को और अधिक मजबूती प्रदान करते हैं।
क्षेत्रीय क्षत्रपों का विशाल प्रभाव पंजाब के ‘बाबा बोहड़’ कहे जाने वाले स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल हों या हरियाणा के ओम प्रकाश चौटाला और भूपिंदर सिंह हुड्डा, इन सभी नेताओं की शारीरिक बनावट उनके ‘धरतीपुत्र’ होने के अहसास को पुख्ता करती है। ग्रामीण भारत की आवाज बनने वाले पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवे गौड़ा और संसदीय मर्यादाओं के संरक्षक पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का व्यक्तित्व भी इसी गौरवशाली सूची का हिस्सा है।
डॉ. अतुल मलिकराम के अनुसार, इन दिग्गजों ने यह साबित किया है कि एक नेता का ‘वजन’ उसकी नीतियों और जनता के प्रति उसके समर्पण से आता है। इन नेताओं की भारी-भरकम कद-काठी आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा और वैचारिक दृढ़ता की एक अमिट मिसाल बनी हुई है।



