नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट (वीपीसीआई) में तंबाकू की लत छुड़ाने की एक शांत लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मुहिम लगातार जारी है। यहां चल रही नेशनल टोबैको क्विटलाइन सर्विस (एनटीक्यूएलएस) रोज देशभर से आने वाली हजारों कॉल्स का जवाब देती है और लोगों को तंबाकू छोड़ने में मदद करती है। पिछले साल यानी 2024 में क्विटलाइन ने 94,788 लोगों को पंजीकरण किया। हालांकि, फॉलो-अप कॉल्स में लोगों की भागीदारी धीरे-धीरे कम हुई, लेकिन इसके बावजूद 19,253 लोगों ने सफलतापूर्वक तंबाकू छोड़ दिया। यह सफलता दर 20 फीसदी से अधिक है, जो बेहद उत्साहजनक है।
कॉल करने वालों में 91 फीसदी पुरुष
काउंसलिंग टीम के मुताबिक ज्यादातर कॉल्स उन लोगों के आते हैं, जो तंबाकू को हानिरहित समझकर शुरू करते हैं, खासकर स्मोकलेस तंबाकू का इस्तेमाल करने वाले। कॉल करने वालों में 91 फीसदी पुरुष और 34 साल से कम उम्र के युवा सबसे ज्यादा हैं। एनटीक्यूएलएस में 100 प्रशिक्षित काउंसलर हैं, जिन्हें मनोविज्ञान और सोशल वर्क की ट्रेनिंग दी गई है। ये काउंसलर लोगों को क्विट डेट तय करवाने से लेकर 1 साल तक लगातार फॉलो-अप करते हैं। सर्विस की सबसे खास बात यह है कि यह प्रोएक्टिव काउंसलिंग पर काम करती है। यानी कॉलर के इंतजार करने की बजाय खुद उन्हें समय-समय पर कॉल किया जाता है। काउंसलर रोज सैकड़ों कॉल्स करते हैं। कभी समझाते हैं, कभी हौसला देते हैं और कभी छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाते हैं। हर कॉल यह साबित करता है कि देश में तंबाकू का संकट भले बड़ा हो, लेकिन लोग इसे छोड़ने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं।
सेवा शुरू होने के पहले दिन ही 40-50 हजार कॉल आए
वीपीसीआई के निदेशक राज कुमार ने बताया कि सेवा शुरू होने के पहले दिन ही 40-50 हजार कॉल आए थे। मौजूदा समय में दिल्ली सहित देश के चार केंद्र मिलकर रोजाना लगभग 15,000 कॉल हैंडल कर रहे हैं। सर्विस अब 15 भाषाओं में उपलब्ध है। 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस अभियान को देशभर में फैलाने के लिए बेंगलुरु (निम्हांस), मुंबई (टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल) और गुवाहाटी (रीजनल कैंसर इंस्टिट्यूट) में नए केंद्र खोले। इन सभी केंद्रों ने पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के मॉडल को अपनाया। अगले चरण में क्विटलाइन एआई-सपोर्टेड काउंसलिंग असिस्टेंट जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे ज्यादा लोगों तक पहुंचना आसान होगा। डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि यह सेवा राष्ट्रीय योगदान है। सरकार द्वारा सभी तंबाकू उत्पादों पर क्विटलाइन नंबर छापे जाने से इसकी पहुंच लाखों लोगों तक बढ़ी है।



