नई दिल्ली। वाइस एडमिरल संजय साधु को युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण का नियंत्रक (सीडब्ल्यूपीएंडए) नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस पद पर कार्यभार संभाल लिया है। साधु ने वाइस एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन का स्थान लिया। वे 1987 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एमफिल हैं। नौसेना में 38 वर्षों से अधिक की सेवा में उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और यार्ड पदों पर काम किया है।
आईएनएस विराट से की थी शुरुआत
वाइस एडमिरल साधु ने अपने करियर की शुरुआत विमानवाहक पोत आईएनएस विराट से की, जहां उन्होंने कई पदों पर जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा उन्होंने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र और आईएनएस दूनागिरी पर भी सक्रिय सेवा दी। फ्लैग रैंक पर पदोन्नति से पहले वे नौसेना डॉकयार्ड (मुंबई) में अतिरिक्त महाप्रबंधक (उत्पादन), नौसेना पोत मरम्मत यार्ड (कारवार) के कमोडोर अधीक्षक और नौसेना मुख्यालय में प्रधान निदेशक समुद्री इंजीनियरिंग जैसे अहम पदों पर तैनात रहे।
कई अहम पदों पर काम किया
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में रूस से विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य के आधुनिकीकरण और अधिग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल है। इस परियोजना के दौरान उन्होंने रूस में वरिष्ठ नौसेना इंजीनियर ओवरसियर, विमानवाहक परियोजना निदेशक और नौसेना मुख्यालय में परियोजना के प्रधान निदेशक जैसे पदों पर कार्य किया।
उन्नत प्रौद्योगिकी पोत कार्यक्रम के कार्यक्रम निदेशक भी रहे
फ्लैग रैंक पर आने के बाद वाइस एडमिरल साधु ने युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक, पूर्वी और पश्चिमी नौसेना कमान के मुख्य कर्मचारी अधिकारी (तकनीकी) तथा विशाखापत्तनम और मुंबई के दो प्रमुख डॉकयार्डों के एडमिरल अधीक्षक के रूप में नेतृत्व किया। वे भारतीय नौसेना में दोनों तटों के दो प्रमुख डॉकयार्डों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। दिल्ली में वे उन्नत प्रौद्योगिकी पोत कार्यक्रम के कार्यक्रम निदेशक के पद पर भी कार्यरत थे।
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उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और नौसेना पदक (NM) से सम्मानित किया गया है। उन्होंने यह पदभार वाइस एडमिरल राजाराम स्वामीनाथन, एवीएसएम, एनएम से ग्रहण किया है, जो 38 वर्षों की सेवा के बाद 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन के कार्यकाल में भारतीय नौसेना में आठ नए जहाज शामिल किए गए, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।



