अरावली पर अस्तित्व का संकट: ‘100 मीटर’ के नए गणित में उलझीं देश की सबसे पुरानी पहाड़ियाँ

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की पहचान के लिए केंद्र सरकार की '100 मीटर ऊँचाई' वाली सिफारिश को स्वीकार किए जाने के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया है

Share This Article:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की पहचान के लिए केंद्र सरकार की ‘100 मीटर ऊँचाई’ वाली सिफारिश को स्वीकार किए जाने के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया है। पर्यावरणविदों का आरोप है कि इस नई परिभाषा के कारण अरावली का एक बड़ा हिस्सा, जो छोटे टीलों और कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों के रूप में है, कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाएगा। इससे हरियाणा और राजस्थान में हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध खनन और कंक्रीट के जंगलों का रास्ता साफ होने का डर है।

थार मरुस्थल को रोकने वाली ‘हरी दीवार’ पर खतरा

भू-वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है।

  • रेगिस्तान का विस्तार: छोटी पहाड़ियाँ कटने से थार मरुस्थल की धूल भरी आँधियाँ सीधे दिल्ली और यूपी तक पहुँचेंगी।
  • जल और वायु संकट: ये पहाड़ियाँ वाटर रिचार्ज जोन और ‘फेफड़ों’ का काम करती हैं; इनके खत्म होने से भूजल स्तर गिरेगा और प्रदूषण का कहर बढ़ेगा।

जन-आक्रोश: गुरुग्राम से उदयपुर तक विरोध प्रदर्शन

शनिवार को गुरुग्राम में ‘अरावली बचाओ संस्था’ ने भारी प्रदर्शन किया, वहीं उदयपुर में भी वकीलों ने इस परिभाषा को पर्यावरण के लिए घातक बताया। विपक्ष ने भी सरकार पर ‘पूंजीपति मित्रों’ को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, 3 अरब साल पुरानी इस पर्वतमाला का हर छोटा हिस्सा जैव-विविधता के लिए अनिवार्य है और इसे ऊँचाई के पैमाने पर बाँटना प्रकृति के साथ खिलवाड़ है।


Samiksha Mishra

samiksha.mishra1222@gmail.com

मैं कॉपीराइटर हूँ, जिसे कंटेंट के ज़रिए कहानियाँ गढ़ने और ब्रांड्स की आवाज को मजबूती देने का तीन वर्षों का पेशेवर अनुभव है। शब्दों की सटीकता, रचनात्मकता और पाठकों से जुड़ाव, यही मेरी लेखनी की पहचान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.