चेन्नई । तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों पानी (जल संसाधन) सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में राज्य विधानसभा के 17वें सत्र के दौरान, राज्यपाल द्वारा दिए गए नीतिगत संबोधन में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने राज्य के जल अधिकारों को लेकर अपना इरादा साफ कर दिया है। यह सिर्फ एक नीतिगत भाषण नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों—कर्नाटक और केरल—के साथ चल रहे जल विवादों पर एक स्पष्ट ‘अल्टीमेटम’ है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर मामला क्या है और सरकार आगे क्या कदम उठाने वाली है:
1. कावेरी का मुद्दा: मेकेदातु बांध के खिलाफ आर-पार की लड़ाई
कावेरी डेल्टा क्षेत्र, जिसे तमिलनाडु का ‘अन्न का कटोरा’ कहा जाता है, आज गंभीर जल संकट के मुहाने पर है।
- विवाद की जड़: कर्नाटक सरकार का प्रस्तावित ‘मेकेदातु बांध’ प्रोजेक्ट। तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि यदि यह बांध बना, तो डेल्टा के लाखों किसानों की खेती पूरी तरह तबाह हो जाएगी।
- कानूनी मजबूती: सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, कर्नाटक हमें हमारा हक का पानी देने में आनाकानी करता है और केवल अधिशेष (surplus) पानी रिलीज करता है।
- सरकार का रुख: राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस परियोजना को रोकने के लिए हर संभव कानूनी उपाय अपनाएगी। तमिलनाडु किसी भी सूरत में अपने किसानों की आजीविका पर आंच नहीं आने देगा।
2. मुल्लापेरियार: ‘नया बांध’ नहीं, मौजूदा का होगा कायाकल्प
मुल्लापेरियार बांध तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों के लिए जीवन-रक्षक (lifeline) है।
- केरल का स्टैंड: केरल सरकार लगातार एक ‘नया बांध’ बनाने की वकालत कर रही है।
- तमिलनाडु का कड़ा विरोध: तमिलनाडु सरकार का कहना है कि केरल न केवल नए बांध की मांग कर रहा है, बल्कि मौजूदा बांध को मजबूत करने के लिए जरूरी मरम्मत कार्यों की अनुमति भी नहीं दे रहा है।
- लक्ष्य: 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप, सरकार का लक्ष्य मौजूदा बांध को मजबूत करना और इसके जल स्तर को बढ़ाकर 152 फीट तक ले जाना है। सरकार ने केरल के नए बांध के प्रयासों को रोकने का संकल्प लिया है।
3. ‘जल सुरक्षा’ के लिए भविष्य का खाका
सरकार ने केवल विवादों पर चर्चा ही नहीं की, बल्कि राज्य में जल क्रांति लाने के लिए भविष्य की योजनाएं भी पेश की हैं:
- नदी जोड़ो अभियान: राज्य के भीतर नदियों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि वह दक्षिणी राज्यों की नदियों को इंटरलिंक करे, ताकि सूखे के समय पानी की कमी न हो।
- चेक डैम और जल संचयन: समुद्र में व्यर्थ बहने वाले पानी को रोकने के लिए रणनीति के तहत चेक डैमों का निर्माण किया जाएगा।
- ग्राम-स्तरीय संरक्षण: तालाबों और झीलों का सालाना रखरखाव (maintenance) अनिवार्य किया जाएगा, ताकि बारिश का पानी जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर (groundwater level) ऊपर उठ सके।
निष्कर्ष और विश्लेषण
यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु सरकार अब रक्षात्मक (defensive) रुख के बजाय आक्रामक और सक्रिय (proactive) रुख अपना रही है। कर्नाटक और केरल के साथ जारी यह जल विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बनेगा। एक तरफ जहां सरकार कानूनी मोर्चे पर मजबूती से लड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ वह अपने जल प्रबंधन तंत्र को भी दुरुस्त करना चाहती है ताकि निर्भरता कम हो।




