संसद में महिला आरक्षण बिल पर घमासान, विपक्ष पर भाजपा का तीखा हमला

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, पारित नहीं हो सका। इस मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है, पारित नहीं हो सका। इस मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। मध्य जिला विकास समिति के चेयरमैन और मोती नगर से भाजपा विधायक हरीश मदन लाल खुराना ने विपक्ष पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में जो हुआ, वह केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा गंभीर विषय है।

विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ का आरोप

हरीश मदन लाल खुराना ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ने से रोककर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उनके अनुसार, विपक्ष ने एक बार फिर राजनीतिक स्वार्थ को देशहित से ऊपर रखा है।

33 प्रतिशत आरक्षण को बताया ऐतिहासिक कदम

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने का संकल्प है। यह पहल समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

राजनीति करने पर जताई आपत्ति

खुराना ने कहा कि महिला सशक्तिकरण जैसे अहम विषय पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों के प्रति किसी भी तरह की अनदेखी को स्वीकार नहीं करेंगी।

केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की सराहना करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राजनीतिक माहौल गरमाया

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर मतभेद सामने आने से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में यह विषय राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रहेगा। कुल मिलाकर, लोकसभा में हुई इस घटना ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के मुद्दे को भी एक बार फिर प्रमुखता से राष्ट्रीय विमर्श में ला खड़ा किया है।

Samiksha Mishra

samiksha.mishra1222@gmail.com

मैं कॉपीराइटर हूँ, जिसे कंटेंट के ज़रिए कहानियाँ गढ़ने और ब्रांड्स की आवाज को मजबूती देने का तीन वर्षों का पेशेवर अनुभव है। शब्दों की सटीकता, रचनात्मकता और पाठकों से जुड़ाव, यही मेरी लेखनी की पहचान है।

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