दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अब नजरें मलक्का जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
सबसे छोटा और व्यस्त समुद्री रास्ता
मलक्का स्ट्रेट हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला सबसे छोटा और व्यस्त समुद्री रास्ता है। इसी कारण मध्य पूर्व, यूरोप और पूर्वी एशिया के बीच होने वाला बड़ा व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा, साथ ही तरलीकृत प्राकृतिक गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य औद्योगिक सामान इसी रास्ते से ट्रांसपोर्ट होते हैं। इस लिहाज से यह जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख धुरी बन चुका है।
इस स्ट्रेट की अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि चीन अपने लगभग 75 प्रतिशत तेल आयात और करीब 60 प्रतिशत समुद्री व्यापार के लिए इसी पर निर्भर है। यही कारण है कि इसे चीन के लिए रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर भारी निर्भरता रखते हैं।
अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग
हाल ही में अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग और इंडोनेशियाई क्षेत्र में संभावित अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की चर्चा ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा या तनाव बढ़ता है, तो इसका असर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर पड़ सकता है।
मलक्का स्ट्रेट पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। समुद्री डकैती, तस्करी और प्राकृतिक आपदाओं जैसे खतरे यहां मौजूद हैं। इसके अलावा, यह जलमार्ग कई जगहों पर बेहद संकरा है, जिससे किसी भी दुर्घटना या अवरोध की स्थिति में वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
इस संदर्भ में “मलक्का डायलेमा” शब्द भी चर्चा में आता है, जिसे हू जिंताओ ने गढ़ा था। इसका मतलब है कि इस जलमार्ग पर अत्यधिक निर्भरता किसी देश के लिए रणनीतिक कमजोरी बन सकती है।
हालांकि वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं, लेकिन वे न तो इतने सुविधाजनक हैं और न ही लागत के लिहाज से व्यावहारिक। इस वजह से निकट भविष्य में मलक्का स्ट्रेट का महत्व कम होने की संभावना नहीं है।
कुल मिलाकर, मलक्का जलडमरूमध्य पर बढ़ती चिंता यह संकेत देती है कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समुद्री मार्ग आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन के केंद्र में बने रहेंगे।



