नई दिल्ली। देश में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी ने पिछले ग्यारह साल में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 28 नवंबर, 2025 को बताया कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद सरकारी योजनाओं से लाभान्वित होने वाली महिला वैज्ञानिकों की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। इंस्पायर, डब्ल्यूआईएसई, किरण और विज्ञान ज्योति जैसी योजनाओं ने लाखों लड़कियों और महिलाओं को विज्ञान की मुख्यधारा में जोड़ा है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री के नारी शक्ति विजन की सबसे बड़ी कामयाबी बताया और कहा कि अब भारतीय प्रयोगशालाएं और अनुसंधान केंद्र महिलाओं के नेतृत्व और योगदान से चमक रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2014 से पहले महिला वैज्ञानिकों के लिए बड़ी योजनाएं या तो नहीं थीं या बहुत सीमित थीं। मोदी सरकार आने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इंस्पायर-MANAK (स्कूल स्तर) पर 2014 से पहले शून्य, थी और 2014-2025 तक 1,76,743 लड़कियां शामिल हुईं। उच्च शिक्षा के लिए इंस्पायर छात्रवृत्ति में 2014 से पहले 23,530, अब तक 50,642 है। वहीं, इंस्पायर फेलोशिप में 2,106 से बढ़कर 5,035 और WISE योजना में 2,713 से बढ़कर 4,419 हुई। इसके अलावा विज्ञान ज्योति योजना में 2014 से पहले शून्य, अब हजारों लड़कियां जुड़ीं है।
STEM में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सरकारी-निजी क्षेत्र मिलाकर STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित) कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी अब 18.6% हो गई है और यह लगातार बढ़ रही है। बाहरी अनुसंधान परियोजनाओं में महिला प्रमुख शोधकर्ता (Principal Investigator) की हिस्सेदारी 2000–01 में 13% थी जो 2019–20 में बढ़कर 25% हो गई।
नारी शक्ति को असली ताकत देने वाली योजनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “नारी शक्ति” का विजन ही इस बदलाव की असली वजह है। पहले योजनाएं बिखरी हुई थीं और करियर में ब्रेक के बाद महिलाएं वापस नहीं लौट पाती थीं। अब पूरा करियर चक्र स्कूल से लेकर लीडरशिप तक कवर किया जा रहा है। WISE, किरण, इंस्पायर फेलोशिप और विज्ञान ज्योति जैसी योजनाओं ने न सिर्फ छात्रवृत्ति दी बल्कि रिसर्च ग्रांट, प्रोजेक्ट लीड करने का मौका और संस्थानों में मान्यता भी दिलाई।
अब महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, निर्णयकर्ता भी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब विशेषज्ञ समितियों, रिव्यू पैनल, राष्ट्रीय मिशनों और सलाहकार समूहों में भी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे नीतियां बनाने में महिलाओं की आवाज शामिल हो रही है और पूरा सिस्टम ज्यादा समावेशी बन रहा है।
भविष्य की ओर एक बड़ा कदम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह प्रगति संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी नीति का नतीजा है। भारतीय लैब, यूनिवर्सिटी, स्टार्टअप और इनोवेशन सेंटर अब महिला वैज्ञानिकों की आकांक्षाओं और नेतृत्व को पूरी तरह दर्शाने लगे हैं। यह यात्रा बताती है कि जब सरकार ठान ले तो “नारी शक्ति” को विज्ञान की मुख्यधारा में लाना नामुमकिन नहीं है।



