कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर ऐसा खौफनाक खेल खेला, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाएगा। कानपुर पुलिस ने 50 वर्षीय शिवबीर सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के दस महीने बाद जघन्य हत्याकांड का खुलासा किया है। इसके साथ ही पुलिस ने इस हत्याकांड के पीछे के काले सच को भी उजागर कर दिया है कि कैसे एक पत्नी ने विश्वासघात करते हुए अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की पटकथा रची, जो किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती।
जानिए पूरा घटनाक्रम…
दिल दहला देने वाली इस खौफनाक साजिश की शुरुआत होती है 1 नवंबर 2024 को, जब सचेंडी थाना क्षेत्र के लालूपुर गांव के रहने वाले शिवबीर सिंह अचानक गुम हो गये। उनकी पत्नी लक्ष्मी ने शुरुआत में यह बहाना बनाया कि शिवबीर गुजरात में रोजगार के सिलसिले में चले गए हैं। इस पर रिश्तेदारों और मोहल्लेवालों को यकीन हो गया, क्योंकि शिवबीर ने पहले भी वहां काम किया था। लेकिन धीरे-धीरे इस झूठ का पर्दाफाश हुआ। गुमशुदगी के 10 महीने बाद, 19 अगस्त को शिवबीर की मां सावित्री देवी ने सचेंडी पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस की जांच ने एक नाटकीय मोड़ तब लिया जब यह बात सामने आई कि लक्ष्मी का अपने भांजे अमित सिंह से नाजायज संबंध था, जो इस हत्या की वजह बनी।
शिवबीर की मां सावित्री देवी और बहन कांती की शिकायत पर पुलिस ने विशेष टीम गठित की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि शिवबीर की पत्नी लक्ष्मी और उसके भांजे अमित सिंह के बीच नाजायज संबंध थे। दोनों को हिरासत में लिया गया, और सख्ती से पूछताछ की गई। शुरुआत में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही दोनों का सच सामने आ गया।
कातिल पत्नी और प्रेमी का कबूलनामा
लक्ष्मी और अमित ने पूरी साजिश को बहुत ही गोपनीय तरीके से तैयार किया था। लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि शिवबीर अक्सर उसे मारता-पीटता था और उसे जानवरों की तरह व्यवहार करता था। उसके मुताबिक, यह सब बर्दाश्त से बाहर हो चुका था। इसलिए उसने अपने प्रेमी अमित के साथ मिलकर शिवबीर की हत्या की साजिश रच डाली। लक्ष्मी ने बताया कि हमने शिवबीर लाश को बगीचे में छुपा दिया था और अगले दिन उसे गाड़ दिया था। बच्चों से कह दिया था कि वह गुजरात में काम करने गए हैं।
हत्या का तरीका खौफनाक
लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि 2 नवंबर 2024 की रात को शिवबीर की चाय में नशीली दवा मिला दी, जिससे वह बेहोश हो गया। इसके बाद अमित ने कुदाल से शिवबीर के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए। जब शिवबीर की सांसें हल्की बची थीं, तो लक्ष्मी ने भी उसे मौत के घाट उतारने के लिए वार किए। शिवबीर की सांसे थमते ही दोनों ने शव को घर के पीछे आंगन में दफना दिया। शव जल्दी गल जाए, इसलिए उसके ऊपर नमक भी डाला गया। हालांकि, दस महीने तक यह काला सच मिट्टी में दबा रहा लेकिन दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने जब खुदाई कराई तो आंगन से कंकाल निकला।
311 दिन बाद हत्याकांड का खुलासा
डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने 311 दिन बाद सचेंडी हत्याकांड का खुलासा किया है। यह जांच तब तक चलती रही, जब तक पुलिस ने गुमशुदगी की सच्चाई की जांच करते हुए लक्ष्मी और अमित को हिरासत में नहीं लिया। पूछताछ में दोनों ने हत्या की साजिश कबूल कर ली। पुलिस ने जब लक्ष्मी और अमित से शव की निशानदेही पर खुदाई कराई, तो वह शिवबीर का कंकाल मिला, जिसे पहचानने के लिए मृतक के परिवार से डीएनए सैंपल लिया गया। डीएनए जांच से यह पुष्टि हो गई कि शव शिवबीर का ही था और पुलिस ने पूरी साजिश को उजागर किया। इस मामले में लक्ष्मी और अमित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की जांच जारी है।
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यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं है, बल्कि यह उस टूटते हुए समाज और रिश्तों की कहानी है, जहां प्यार, विश्वास और परिवार के नाम पर सबसे खौ़फनाक अपराध किए जा रहे हैं। इससे पहले मेरठ में मुस्कान और इंदौर में सोनम जैसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या कर दी थी। सचेंडी के इस हत्याकांड ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा किया है कि क्या हमें आजकल रिश्तों और विश्वास पर भरोसा करना चाहिए? क्या प्यार के नाम पर रिश्तों का खून करना इंसानियत को शर्मिंदा नहीं करता? यह घटनाएं दिल दहला देने वाली हैं, जो यह साबित करती हैं कि जब रिश्तों में विश्वास टूटता है, तो इंसानियत शर्मसार होती है।



