नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार रूस से तेल खरीद (Russia Oil Imports) के मुद्दे पर बयानबाजी कर रहे हैं। उनका कहना है कि रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना ही फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता है। इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (Scott Besant) ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अगर और कड़े कदम उठाते हैं तो रूसी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।
अमेरिका-यूरोप की रणनीति
एक इंटरव्यू में बेसेंट से पूछा गया कि आखिर अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) रूस पर और किस तरह का दबाव बना सकते हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि रूस पर असर डालने का सबसे बड़ा जरिया है तेल और गैस का कारोबार। यदि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर और पाबंदियां लगाई जाती हैं तो रूसी राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा और उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
‘अब यह एक रेस बन गई है’
स्कॉट बेसेंट ने कहा, “यह अब एक तरह की रेस है। एक तरफ यूक्रेन (Ukraine War) की सेना है जो रूस का मुकाबला कर रही है और दूसरी तरफ रूसी अर्थव्यवस्था है जो प्रतिबंधों का दबाव झेल रही है। सवाल यह है कि कौन पहले थकेगा?” उनके मुताबिक अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने को तैयार है लेकिन यूरोपीय देशों का सहयोग भी जरूरी है।
रूस को ध्वस्त करने की कोशिश?
बेसेंट का कहना है कि यदि अमेरिका और यूरोपीय संघ एक साथ कदम उठाते हैं और रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त प्रतिबंध थोपते हैं, तो रूस की अर्थव्यवस्था लगभग ध्वस्त हो सकती है। उनका मानना है कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होंगे।
भारत पर भी निशाना
इस बीच भारत (US-India Trade) को लेकर भी ट्रंप प्रशासन ने कड़ा रुख दिखाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर भारत रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना जारी रखता है तो अमेरिका “बहुत निराश” होगा। उनके मुताबिक रूस को आर्थिक सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
अतिरिक्त टैरिफ का ऐलान
भारत पर पहले से लागू 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ के अलावा ट्रंप प्रशासन ने 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ और थोप दिया है। इसका सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। यह कदम ट्रंप सरकार की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके जरिए वह रूस से जुड़े देशों को चेतावनी देना चाहती है।
वैश्विक असर की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और यूरोप मिलकर रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाते हैं तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिलेगा। रूस दुनिया के बड़े तेल निर्यातकों में से एक है, ऐसे में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन का रुख इस समय बेहद आक्रामक दिखाई दे रहा है। रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने की यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि इसका असर न केवल रूस या यूक्रेन पर बल्कि भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।



