नई दिल्ली। उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर(महाकाल मंदिर)के गर्भगृह में नेताओं और वीआईपी को प्रवेश दिए जाने से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी रहेगा, जिसमें गर्भगृह में प्रवेश को लेकर अंतिम फैसला लेने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर को दिया गया है।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश में कोई दखल नहीं देगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में ही अपनी बात रखने की सलाह दी। इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट ने महाकाल मंदिर समिति को निर्देश देते हुए कहा था कि गर्भगृह में प्रवेश से जुड़ा निर्णय जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आएगा।
अधिवक्ताओं ने उठाया था समानता का मुद्दा
महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक के बाद इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इसे समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया था।
कलेक्टर तय करेंगे कौन है वीआईपी
करीब छह महीने पहले इस मामले पर सुनवाई करते हुए इंदौर हाईकोर्ट ने साफ किया था कि गर्भगृह में किसे प्रवेश दिया जाएगा, इसका निर्णय उज्जैन कलेक्टर करेंगे। अदालत ने कहा था कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को अनुमति देते हैं, तो उसी आधार पर उसे वीआईपी माना जाएगा।
ढाई साल से बंद है गर्भगृह
महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 4 जुलाई 2023 को सावन माह में बढ़ती भीड़ को देखते हुए बंद किया गया था। उस समय मंदिर समिति ने कहा था कि सावन समाप्त होते ही गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि, सावन के बाद भी गर्भगृह अब तक नहीं खोला गया है।



