दुर्लभ आयुर्वेदिक पांडुलिपियां अनुसंधान के लिए उपलब्ध

सीसीआरएएस-सीएसयू के सहयोग से केरल के त्रिशूर स्थित सीएसयू पुरनट्टुकरा में आयुर्वेदिक पांडुलिपियों पर कार्यशाला का आयोजन किया।

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नई दिल्ली। भारत की शास्त्रीय चिकित्सा विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (सीएसयू) के सहयोग से 12 से 25 जनवरी, 2026 तक केरल के त्रिशूर स्थित सीएसयू पुरनट्टुकरा (गुरुवायूर) परिसर में आयुर्वेदिक पांडुलिपियों पर 15 दिवसीय लिप्यंतरण क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

सीसीआरएएस-सीएसयू के बीच हुआ समझौता

दो सप्ताह के आवासीय कार्यक्रम में आयुर्वेद के 18 और संस्कृत के 15 अध्‍येताओं सहित 33 अध्‍येता एक साथ आए, जिससे पांडुलिपि अध्ययन के लिए एक अंतःविषय दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला। सीसीआरएएस और सीएसयू के बीच हुए समझौता ज्ञापन के तहत आयोजित यह कार्यशाला, शास्त्रीय आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और शोध-आधारित इस्‍तेमाल के लिए सीसीआरएएस की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा थी। दो सप्ताह के इस आवासीय कार्यक्रम में आयुर्वेद के 18 और संस्कृत के 15 अध्‍येताओं सहित 33 अध्‍येताओं ने भाग लिया, जिससे पांडुलिपि के अध्ययन के लिए एक अंतःविषयक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला।

कार्यक्रम में पांडुलिपि विज्ञान, पुरालेख विज्ञान, आयुर्वेद की तकनीकी शब्दावली को शामिल किया

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पांडुलिपि विज्ञान, पुरालेख विज्ञान, आयुर्वेद की तकनीकी शब्दावली और लिपि ज्ञान जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया, साथ ही ग्रंथा और वट्टेझुथु लिपियों पर विशेष लिपि परिचय सत्र भी आयोजित किए गए। ग्रंथा, मध्यकालीन मलयालम और वट्टेझुथु लिपियों में व्यावहारिक लिप्यंतरण प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को मूल ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियों पर सीधे काम करने और कम समय में सत्यापन योग्य विद्वतापूर्ण परिणाम तैयार करने में मदद मिली।

आयुर्वेद की पांच दुर्लभ और अप्रकाशित पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक लिप्यंतरण किया गया

कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण विद्वतापूर्ण परिणाम के रूप में, आयुर्वेद की पांच दुर्लभ और अप्रकाशित पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक लिप्यंतरण किया गया है और अब ये उन्नत शोध के लिए उपलब्ध हैं। इनमें 146 ताड़ के पत्तों पर लिखी धन्वंतरि (वैद्य) चिंतामणि शामिल है, जिसका ग्रंथा से संस्कृत में लिप्यंतरण किया गया है; 110 पृष्ठों की ग्रंथा पांडुलिपि द्रव्यशुद्धि, जिसका संस्कृत में लिप्यंतरण किया गया है; 59 पृष्ठों की मध्यकालीन मलयालम पांडुलिपि वैद्यम, जिसका मलयालम में लिप्यंतरण किया गया है; 75 पृष्ठों की रोग निर्णय, भाग-I, जिसका मध्यकालीन मलयालम से मलयालम में लिप्यंतरण किया गया है; और 78 ताड़ के पत्तों पर लिखी वट्टेझुथु पांडुलिपि विविधारोगंगल, जिसका मलयालम और संस्कृत दोनों में लिप्यंतरण किया गया है।

कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित करते हुए, सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रोफेसर वैद्य रबीनारायण आचार्य ने कहा कि यह कार्यशाला सीसीआरएएस की आयुर्वेद पांडुलिपि के शोध की पहल के अंतर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के साथ दूसरा सहयोगात्मक कार्यक्रम था। उन्होंने बताया कि ओडिशा के सीएसयू पुरी परिसर में आयोजित पहली कार्यशाला में 14 आयुर्वेदिक पांडुलिपियों का लिप्यंतरण किया गया था, जो इस राष्ट्रीय प्रयास की निरंतरता और विस्तार को दर्शाता है।

सीएसयू गुरुवायूर परिसर के निदेशक प्रोफेसर के.के. शाइन ने प्रोफेसर के. विश्वनाथन के साथ मिलकर सीसीआरएएस के साथ भविष्य में सहयोग करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया, विशेष रूप से मलयालम आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के व्यवस्थित संरक्षण, विद्वतापूर्ण प्रसंस्करण और पुनरुद्धार के लिए, जो भारत की क्षेत्रीय चिकित्सा विरासत का एक महत्वपूर्ण घटक हैं।

कार्यक्रम का समन्वय सीएसयू के प्रोफेसर के. विश्वनाथन और सीसीआरएएस की डॉ. पार्वती जी. नायर ने किया। समापन सत्र में सीसीआरएएस-राष्ट्रीय आयुर्वेद पंचकर्म अनुसंधान संस्थान (एनएआरआईपी) के प्रभारी डॉ. वी सी दीप, वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों के साथ उपस्थित थे। इस कार्यशाला की व्यापक रूप से सराहना की गई, क्योंकि इसमें आयुर्वेद और संस्कृत के विद्वानों को शामिल करते हुए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया गया था और सीमित समय में शोध के ठोस परिणाम प्राप्त हुए थे। सीसीआरएएस ने कहा कि इस तरह की पहल से साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को मजबूती मिलेगी, क्षेत्रीय चिकित्सा परंपराओं का संरक्षण होगा और भारत के शास्त्रीय चिकित्सा ज्ञान के दीर्घकालिक संरक्षण में सहायता मिलेगी।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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