नई दिल्ली: भारत सरकार ने हाईवे टोल (फीस) को लेकर एक नया नियम बनाया है। अब अगर कोई वाहन बिना फास्टैग के टोल प्लाज़ा पर आएगा और कैश यानी नकद पेमेंट करेगा, तो उससे डबल टोल लिया जाएगा। लेकिन अगर वही व्यक्ति UPI जैसे PhonePe, Google Pay आदि से पेमेंट करता है, तो उसे सिर्फ 1.25 गुना टोल देना होगा। इस नियम का मकसद है लोगों को डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ाना और हाईवे पर ट्रैफिक को कम करना। उदहारण के लिए अगर कोई वाहन फास्टैग से टोल 100 रुपये शुल्क देता है तो नकद में भुगतान करने पर उसे 200 रुपये देने पड़ेंगे, वहीं अगर UPI से शुल्क भुगतान करता है तो फिर 125 रुपये देंगे पड़ेंगे।
इस दिन से लागू होगा नया नियम
UPI टोल को लेकर नया नियम 15 नवंबर से लागू हो जाएगा। सरकार के इस नियम से रेवेन्यू पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि 98 फीसदी टोल पेमेंट फास्टैग से होते रहे हैं। सरकार का असली मकसद कैश ट्रांजैक्शन को खत्म करके यात्रियों के लिए सफर आसान बनाना है। इससे पहले, 15 अगस्त को, सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक वार्षिक फास्टैग पास लॉन्च किया था। इस पास की कीमत 3,000 रुपये है। इस पास के जरिए उपयोगकर्ता 200 बार टोल प्लाजा पार कर सकते हैं। इससे एक टोल प्लाजा की लागत लगभग 15 रुपये रह जाएगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ कम होगी।
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सरकार की प्रतिबद्धता
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) (तृतीय संशोधन) नियम, 2025 के तहत इसे अधिसूचित किया है। मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर सुचारू, तेज और अधिक पारदर्शी टोल संग्रह के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।



