न्याय की राह हो रही आसान, सरकार ने यह किए काम

केंद्र सरकार न्यायिक व्यवस्था के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने पर काम कर रही है। इसके लिए कई योजनाओं चल रही हैं। इस वक्त जोर तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने का है।

Share This Article:

नई दिल्ली: भारत में न्याय व्यवस्था तो बेहतर लेकिन इसकी दहलीज थोड़ी ऊंची जिसे पार करने में काफी वक्त लग जाता है। शायद इसी वजह से अक्सर लोग कहते हैं कि मामले को रफा-दफा करो, मुझे कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ना है। अब लोगों की यह सोच धीरे-धीरे बदल रही। छोटे-छोटे मामले में जल्द से निपट रहे हैं। न्यायपालिका का इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी तेजी से विकिसत किया जा रहा है। भारतीय न्यायपालिका के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) विकास के लिए ई-कोर्ट परियोजना को 2007 से एकीकृत मिशन मोड परियोजना के रूप में क्रियान्वित किया जा रहा है। 
विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि ई-फाइलिंग प्रणाली (संस्करण 3.0) को अप्रग्रेड सुविधाओं के साथ शुरू किया गया है। इससे जिससे वकील मामलों से संबंधित दस्तावेजों को किसी भी स्थान से अपलोड कर सकते हैं। शुल्क आदि के सरल हस्तांतरण के लिए ई-भुगतान प्रणाली शुरू की गई है। राष्ट्रीय सेवा और इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं की ट्रैकिंग (एनएसटीईपी) प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रक्रिया तामील और समन जारी करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जजमेंट सर्च पोर्टल राह कर रहा सुगम
बेंच, केस प्रकार, केस संख्या, वर्ष, याचिकाकर्ता व प्रतिवादी का नाम सरीखी सुविधाओं के साथ एक जजमेंट सर्च पोर्टल शुरू किया गया है। यह निशुल्क सुविधा सबके लिए उपलब्ध है। नागरिक-केंद्रित सेवाओं तक आसान और परेशानी मुक्त पहुंच की सुविधा के लिए देश भर में 1814 ई-सेवा केंद्र (सुविधा केंद्र) स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, यातायात संबंधी अपराधों की सुनवाई के लिए 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 29 वर्चुअल कोर्ट कार्यरत हैं।

12 हजार करोड़ रुपये हुए खर्च
न्याय विभाग ने 1993-94 से न्यायपालिका के लिए ढांचागत बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) को लागू कर रहा है। इसमें पांच कंपोनेंट हैं: न्यायालय कक्ष, आवासीय क्वार्टर, वकीलों के कक्ष, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालय परिसर। शुरू से अब तक इस योजना के तहत 12,101.89 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। 8,657.59 करोड़ रुपये (71.54 प्रतिशत) 2014-15 के बाद से जारी किए गए हैं। 
ई-न्यायालय परियोजना के तीसरे चरण (2023 से 2027 की अवधि के लिए) में न्यायालय प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार और वकीलों, मुकदमा करने वालों और न्यायाधीशों सहित विभिन्न हितधारकों के लिए सेवाओं के डिजिटलीकरण के संबंध में कई कदम उठाए गए हैं।

देश भर में 5.2 करोड़ से ज्यादा मुकदमें कोर्ट में पेंडिंग
कोर्ट और सरकार द्वारा संचालित ‘राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड‘ के आंकड़े बताते हैं कि देश भर में 5.2 करोड़ से ज़्यादा मुक़दमे सभी कोर्ट में लंबित हैं। इनमें 60 लाख से ज़्यादा मामले 10 साल से ज़्यादा समय से चलते आ रहे हैं।

हाई कोर्ट में खाली है जजों के 371 पद
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था कि देश भर के हाईकोर्ट में 18 जुलाई, 2025 की स्थिति के अनुसार न्यायाधीशों के कुल 371 पद खाली हैं। उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कुल स्वीकृत संख्या 1,122 है जिनमें से 751 न्यायाधीश वर्तमान में कार्यरत हैं जबकि 371 पद खाली पड़े हैं।

Ashutosh Mishra

mishutosh@yahoo.co.in

Lorem Ipsum Dolor sit amet

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.