सहयोग से साकार होगा विकास का सपना, हर तहसील में बनेंगे मॉडल सहकारी गांव

केंद्र सरकार ने नई सहकारिता नीति लागू कर दी है। इसमें लक्ष्य है कि 2034 तक सहकारी क्षेत्र का देश के जीडीपी में योगदान तीन गुना बढ़ाने का है।

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नई दिल्ली: हर तहसील में पांच-पांच मॉडल गांव बनाए जाएंगे ताकि विकसित देश का सपना साकार हो सके। सरकार 2034 तक जीडीपी में सहकारी क्षेत्र का योगदान तीन गुना बढ़ाने के उद्देश्य से काम कर रही है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति दूरदृष्टिपूर्ण, व्यवहारिक और रिजल्ट ओरिएंटेड है। हर तहसील में 5-5 मॉडल सहकारी गाँव विकसित करना नीति का लक्ष्य है। इसका फोकस गांव, कृषि, ग्रामीण महिलाएं, दलित और आदिवासी पर है। सहकारी समितियों की संख्या में 30% की वृद्धि, हर गांव में कम से कम एक सहकारी समिति की स्थापना करना इसका उसका उद्देश्य है। इस दौरान केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु भी मौजूद रहे।

‘सहकारिता का ही फ्यूचर है’
शाह ने कहा कि प्रशिक्षित मैनपावर के लिए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की नींव पड़ चुकी है। इस साल के अंत तक हम ‘सहकार टैक्सी’ भी ले आएंगे जिसमें सीधा मुनाफा ड्राइवर के पास जाएगा। हमने एक्सपोर्ट, बीज और ऑर्गेनिक उत्पादों की ब्रांडिंग औऱ मार्केटिंग के लिए तीन बहुराज्यीय सहकारी समिति बनाई हैं। श्वेत क्रांति 2.0 आने वाले दिनों में ग्रामीण विकास का बहुत बड़ा स्तंभ बनेगी।
यह नीति 25 साल तक सहकारिता क्षेत्र को प्रासंगिक बनाएगी, योगदान देने वाला और भविष्य का क्षेत्र भी बनाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से पहले कुछ लोगों ने सहकारिता को मृतप्राय क्षेत्र घोषित कर दिया था, लेकिन आज वही लोग कहते हैं कि सहकारिता क्षेत्र का भी फ्यूचर है। उन्होंने कहा कि जब सभी राज्य इस नीति को बारीकी से लागू करेंगे, तब एक सर्वसमावेशी, आत्मनिर्भर, और भविष्योन्मुखी मॉडल बनेगा, जो देश की सहकारी व्यवस्था को नया स्वरूप प्रदान करेगा।

पर्यटन, टैक्सी, बीमा, और हरित ऊर्जा के लिए योजना तैयार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पर्यटन, टैक्सी, बीमा, और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए सहकारिता मंत्रालय ने विस्तृत योजना तैयार की है। विशेष रूप से टैक्सी और बीमा क्षेत्र में बहुत कम समय में शानदार शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा कि नए उभरते क्षेत्रों में सहकारी इकाइयों की भागीदारी का मतलब है कि सफल सहकारी इकाइयां एकजुट होकर नई सहकारी इकाई बनाएंगी, जो नए क्षेत्रों में काम शुरू करेगी। इसका मुनाफा इकाइयों के माध्यम से अंततः ग्रामीण स्तर की पैक्स (PACS) के सदस्यों तक पहुंचेगा। इस तरह एक बड़ा और मजबूत सहकारी इकोसिस्टम तैयार करना हमारा लक्ष्य है। साथ ही, भविष्य की पीढ़ियों के लिए सहकारिता को देश के विकास का एक महत्वपूर्ण साधन बनाने का दृढ़ विश्वास स्थापित करना भी हमारा उद्देश्य है। 

नीति के लक्ष्य

  • 50 करोड़ नागरिक को सहकारी क्षेत्र का सक्रिय सदस्य बनाना 
  • 30 प्रतिशत तक सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना। फिलहाल 8 लाख 30 हजार समितियां हैं। 
  • प्रत्येक पंचायत में एक प्राथमिक सहकारी इकाई होगी, जो प्राथमिक कृर्षि ऋण समितियां  (PACS), प्राथमिक डेयरी, प्राथमिक मत्स्य पालन समिति, प्राथमिक बहुउद्देश्यीय पैक्स, या अन्य प्राथमिक इकाई हो सकती है। इनके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे। 
  • पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता, और संस्थागत विश्वास को बढ़ाने के लिए प्रत्येक इकाई को सशक्त करना होगा। इसके लिए क्लस्टर और मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।
  • राज्य सहकारी बैंकों के माध्यम से प्रत्येक तहसील में 5 मॉडल सहकारी गांव स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
  • श्वेत क्रांति 2.0 के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता को इससे जोड़ा जाएगा।

इंटरनेशनल मार्केट तक होगी पहुंच
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्लोबल विस्तार और इंटरनेशनल मार्केट में पहुंच बनाने के लिए एक्सपोर्ट कोऑपरेटिव बनाई गई है। तकनीक के आधार पर पारदर्शी प्रबंधन करने के लिए पैक्स का मॉडल बन चुका है और आने वाले दिनों में हर प्रकार की कोऑपरेटिव में तकनीक के आधार पर पारदर्शी प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। पर्यावरण के स्थायित्व और ‘सहकारिता में सहकार’ (Cooperation Amongst Cooperatives) के माध्यम से हम आगे बढ़ाएंगे।

750 सुझाव, 17 बैठकें,  RBI और नाबार्ड के मश्वरा से तैयार हुई नीति
राष्ट्रीय सहकारिता नीति –2025 को सुरेश प्रभु  की अगुवाई वाली 40 सदस्यों की समिति ने तैयार की है। उसने क्षेत्रीय कार्यशालाएं कीं और कोऑपरेटिव क्षेत्र के नेताओं, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, मंत्रालयों सहित सभी पक्षों से विशेष चर्चा कर नीति बनाई। समिति के पास लगभग 750 सुझाव आए, 17 बैठकें हुईं फिर आरबीआई तथा नाबार्ड के साथ परामर्श कर नीति को अंतिम रूप दिया गया।

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