नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक से पहले केंद्र सरकार ने राज्य को दो बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सौगात दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 7,616 करोड़ रुपये की दो अहम योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें से एक परियोजना, बिहार, झारखंड और बंगाल को जोडऩे वाले रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण है, जबकि दूसरी हाई-स्पीड हाईवे परियोजना है, जिससे पूर्वी बिहार की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। जिससे झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के 28 लाख से अधिक लोगों को फायदा होगा। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक देवघर से तारापीठ जुड़ जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को इसका लाभ होगा। साथ ही माल ढुलाई में भी आसानी होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
रेलवे की दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी
इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से परिवहन में सुधार होगा जिससे भारतीय रेलवे की दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। इस मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव से परिचालन आसान होगा और भीड़भाड़ कम होगी जिससे भारतीय रेलवे के इन सबसे व्यस्ततम खंडों पर आवश्यक बुनियादी ढांचागत विकास संभव होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएगा और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा।
Bhagalpur – Dumka – Rampurhat railway line doubling approved by the Cabinet (177 km | ₹3,169 Cr)
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) September 10, 2025
🛤️ Will enhance connectivity for Bhagalpur and Banka districts (Bihar), Godda and Dumka districts (Jharkhand) and Birbhum district (West Bengal).
🛤️ Will improve passenger movement… pic.twitter.com/CrXzcsFNp7
परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई
ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। ये परियोजनाएं रेल यातायात के साथ-साथ सामानों की ढुलाई के लिए भी निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के पांच जिलों को कवर करने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 177 किलोमीटर की वृद्धि होगी। यह खंड मोकामा, बड़हिया, लखीसराय, जमालपुर, मुंगेर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शहरों से होकर गुजरता है या उन्हें कनेक्टिविटी प्रदान करता है,
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बांका, गोड्डा और दुमका तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी बढ़ेगी
मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 441 गांवों और 28.72 लाख आबादी तथा तीन आकांक्षी जिलों (बांका, गोड्डा और दुमका) तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी। कोयला, सीमेंट, उर्वरक, ईंट और पत्थर आदि जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए यह एक आवश्यक मार्ग है। इन क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 15 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे, पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत, तेल आयात (5 करोड़ लीटर) और सीओ2 उत्सर्जन (24 करोड़ किलोग्राम) कम करने में मदद करेगा, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
पूर्वी बिहार में मुंगेर-जमालपुर-भागलपुर औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा
आयुध कारखाने (मौजूदा बंदूक कारखाना और रक्षा मंत्रालय द्वारा आयुध कारखाना गलियारे के हिस्से के रूप में प्रस्तावित एक और कारखाना), लोकोमोटिव वर्कशॉप (जमालपुर में), खाद्य प्रसंस्करण (जैसे, मुंगेर में आईटीसी) और संबंधित रसद एवं भंडारण केंद्रों के बल पर एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। भागलपुरी सिल्क (भागलपुर में प्रस्तावित वस्त्र इको-सिस्टम) की प्रमुखता के बीच भागलपुर वस्त्र और रसद केंद्र के रूप में उभर रहा है। वहीं बड़हिया खाद्य पैकेजिंग, प्रसंस्करण और कृषि-गोदाम के लिए एक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों से भविष्य में मोकामा-मुंगेर खंड पर माल ढुलाई और यातायात का विस्तार होने की उम्मीद है।
4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर
टोल टैक्स की प्रणाली से युक्त 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर 100 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड के साथ वाहन की 80 किमी/घंटा की औसत गति को सपोर्ट करता है। इससे यात्रा में लगने वाला समय लगभग 1.5 घंटे तक कम हो जाएगा। साथ ही, यह यात्री और मालवाहक वाहनों, दोनों के लिए सुरक्षित, तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। 82.40 किलोमीटर की प्रस्तावित परियोजना से लगभग 14.83 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 18.46 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा। प्रस्तावित गलियारे के आसपास के क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण यह परियोजना अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।



