2050 तक दोगुना हो सकता है निर्माण क्षेत्र का कार्बन पदचिह्न

एक ताजा अध्ययन के मुताबिक दुनिया के कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के करीब एक-तिहाई के लिए निर्माण क्षेत्र जिम्मेवार है, जबकि 1995 में यह आंकड़ा महज 20 फीसदी था

Share This Article:

नई दिल्ली: शहरों के आसमान छूते टावरों और सड़कों का जाल दुनिया को जोड़ तो रहा है, लेकिन साथ ही जलवायु को चीर भी रहा है। एक ताजा वैश्विक रिसर्च ने अलार्म बजाया है। अगर निर्माण की यह भागदौड़ न रुकी, तो 2050 तक इस सेक्टर का कार्बन उत्सर्जन दोगुना हो जाएगा। नतीजा? पेरिस समझौते के सपने चूर-चूर। वैज्ञानिकों का मानना है कि सीमेंट-स्टील की इस लत ने हमें फंसाया है, और अब वक्त है विकल्प तलाशने का, वरना ग्लोबल वार्मिंग की आग में सब जल जाएंगे।

उत्सर्जन का ब्रेकडाउन: सीमेंट-स्टील पर 55% बोझ

रिसर्च में खुलासा हुआ कि 2022 में निर्माण से निकले कुल कार्बन के 55% के पीछे सीमेंट, ईंटें और धातुएं हैं। कांच, प्लास्टिक, केमिकल्स व बायो-मटेरियल्स ने 6% का योगदान दिया, जबकि बाकी 37% ट्रांसपोर्ट, मशीनरी, सर्विसेज और साइट वर्क से आया। बीजिंग यूनिवर्सिटी के लीड रिसर्चर चाओहुई ली बताते हैं, आज ग्लोबल CO2 का एक तिहाई निर्माण से आ रहा है, 1995 में यह सिर्फ 20% था। अगर यही सिलसिला चला, तो 2040 तक ये अकेले 2 डिग्री की कार्बन लिमिट तोड़ देंगे।

भविष्य के अनुमान: 440 गीगाटन का बम

‘कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट’ जर्नल में छपी इस स्टडी ने 1995-2022 के 49 देशों और 163 सेक्टर्स के डेटा का गहरा विश्लेषण किया। निष्कर्ष डराने वाले रहे। बिना बदलाव के, 2023-2050 में बिल्डिंग्स व इंफ्रास्ट्रक्चर से 440 गीगाटन CO2 निकलेगा। यह 1.5 डिग्री वार्मिंग के लिए रखे पूरे कार्बन बजट को उड़ाकर रख देगा। परिणामस्वरूप, हीटवेव्स, बाढ़, सूखे जैसी आपदाएं रोजमर्रा बन जाएंगी, और धरती का तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर चढ़ जाएगा। शोध बताता है कि ये अकेला सेक्टर अगले 20 सालों में 1.5-2 डिग्री के सालाना बजट को ही निगल लेगा।

शिफ्टिंग बर्डन: अमीर से गरीब देशों पर साया

एक और चौंकाने वाली बात उत्सर्जन अब रिच नेशंस से डेवलपिंग वर्ल्ड में ट्रांसफर हो रहा है। 1995 में आधा कार्बन अमीर देशों से आता था, लेकिन 2022 तक वहां ग्रोथ रुकी। उधर, इमर्जिंग इकोनॉमिज में कंस्ट्रक्शन बूम के साथ सीमेंट-स्टील का इस्तेमाल चढ़ा, जबकि वुड व नैचुरल मटेरियल्स पीछे छूट गए। रिसर्चर्स चेताते हैं, यह मौका गंवाना है कि कम-कार्बन ऑप्शंस को इग्नोर करने से हम खुद को बांध रहे हैं।

‘मटेरियल रेवोल्यूशन’ की पुकार: बांस-लकड़ी से नई शुरुआत

स्टडी की मुख्य सिफारिश है ‘ग्लोबल मटेरियल रेवोल्यूशन’ पारंपरिक हाई-एमिशन मटेरियल्स को रीसायकल्ड, बांस, टिंबर जैसे लो-कार्बन विकल्पों से बदलना। ली कहते हैं, सीमेंट-ईंट-मेटल्स ही 50%+ उत्सर्जन के क Culprit हैं। अब सर्कुलर डिजाइन और इनोवेशन की जरूरत है। को-ऑथर जुर्गन क्रॉप जोड़ते हैं, हर देश की चुनौतियां अलग, लेकिन सबको ईंट-स्टील की लत छोड़नी होगी। सस्टेनेबल अल्टरनेटिव्स खोजो, वरना संकट गहरा जाएगा।

अमीर देश लीड करें, गरीबों को हाथ थामें

रिसर्चर्स का मंत्र साफ – डेवलप्ड नेशंस इनोवेशन, स्ट्रिक्ट रूल्स व सर्कुलर प्रैक्टिसेज से रास्ता दिखाएं। डेवलपिंग कंट्रीज, जहां नई बिल्डिंग्स का धमाल मचा है, को फंडिंग व टेक सपोर्ट मिले। IIASA डायरेक्टर हांस होआखिम शेल्नहुबर चेताते हैं, “हमने खुद को कंक्रीट-स्टील की जेल में बंद कर लिया। पेरिस गोल्स बचाने के लिए शहरों की बुनियाद ही बदलनी पड़ेगी। रीयूज, इनोवेट, कोलैबोरेट – ये ‘मटेरियल रेवोल्यूशन’ हमें स्ट्रॉन्गर फ्यूचर दे सकती है।”

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.