नई दिल्ली: कहते हैं अगर आपदा की जानकारी पहले से मिल जाए तो जान-माल के नुकसान से काफी हद तक बचा जा सकता है। अब यह सपना पूरा होने वाला है क्योंकि भारी बारिश और तूफान का अलर्ट पहले ही मोबाइल पर मिल जाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के 19वें स्थापना दिवस पर किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि अब हम उस मुकाम पर पहुंच गए हैं जहां मोबाइल फोन पर लाइव मौसम अलर्ट, चक्रवात संबंधी चेतावनी, वायु गुणवत्ता अपडेट और समुद्री पूर्वानुमान की जानकारी ले सकते हैं।
कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, संयुक्त सचिव डी. सेंथिल पांडियन, भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा व कार्यक्रम प्रमुख डॉ. विजय कुमार ने भाग लिया। इसमें विशिष्ट अतिथि के तौर पर टेक्सास विश्वविद्यालय में यूनेस्को अध्यक्ष प्रोफेसर देव नियोगी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
14 नए वैज्ञानिक उपकरण और डिजिटल सेवाएं शुरू
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विभिन्न संस्थानों की ओर से विकसित 14 प्रमुख उत्पादों और पहल का औपचारिक शुभारंभ किया। इनमें वर्षा निगरानी और फसल-मौसम कैलेंडर, भारत पूर्वानुमान प्रणाली – विस्तारित अवधि पूर्वानुमान (भारतएफएस-ईआरपी) जैसी उन्नत मौसम पूर्वानुमान प्रणालियां, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वर्षा डेटासेट, अद्यतन तरंग एटलस और समुद्र तल चार्ट, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणालियां, समुद्री जैव विविधता रिपोर्ट और चार भारतीय शहरों के भूकंपीय सूक्ष्म क्षेत्रीकरण अध्ययन शामिल हैं। इस मौके पर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा निर्मित “लाइफ सेविंग इम्पैक्ट” नाम की एक नई डाक्यूमेंटरी भी रिलीज़ की गई।
मिशन मोड में काम कर रही सरकार
डॉ. सिंह ने कहा कि एक दशक में मंत्रालय के कामकाज, इसकी पहुंच और लोगों के जीवन पर इसके वास्तविक प्रभाव से उल्लेखनीय बदलाव आया है। विज्ञान और नवाचार पारिस्थितिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ ही आगामी दशकों में भारत के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह मिशन मोड में काम करने वाली सरकार और एक ऐसे मंत्रालय के कार्य परिणाम हैं जिसने स्वयं को नागरिक सेवा केंद्रित संस्थान के रूप में ढाल लिया है।
डॉप्लर मौसम रडार 15 से 41 हुए
मंत्री ने कहा कि देश में आज डॉप्लर मौसम रडार की संख्या 15 से बढ़कर 41 हो गई है। इसी तरह, भूकंपीय और मौसम केंद्र, अपर एयर ऑब्जर्वेशन सिस्टम, आकाशीय बिजली का पता लगाने वाले नेटवर्क और वर्षामापी संयंत्र सभी दोगुने से भी अधिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अब भूकंप के दो से तीन मिनट बाद ही अलर्ट जारी कर दिए जाते हैं, जिन्हें लाखों लोग तुरंत ऑनलाइन देख पाते हैं।
हाल के तूफानों में जान-माल का नुकसान नहीं
उन्होंने चक्रवाती तूफानों के पूर्वानुमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग की प्रगति की सराहना की और कहा कि अब मौसम की चरम स्थिति संबंधी चेतावनियां 10 दिनों की समय-सीमा में उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉ. सिंह ने स्मरण कराया कि कैसे 1999 के महाचक्रवात में ओडिशा में दस हजार लोगों के हताहत होने के बाद इस क्षेत्र में कई सुधार लाकर समय पर चेतावनी संबंधी प्रणाली विकसित की गई, जिससे हाल के तूफ़ानों में जान-माल की न्यूनतम क्षति हुई।
मेघदूत ऐप से सात लाख लोग जुड़े
उन्होंने कहा कि सात लाख से अधिक किसान मंत्रालय के मेघदूत ऐप पर पंजीकृत हैं। वे बुवाई, सिंचाई और कटाई की योजना बनाने के लिए इसकी सलाह का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार, तटीय क्षेत्रों के मछुआरे सुरक्षित और ईंधन-कुशल मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों के निर्धारण के लिए दैनिक एसएमएस अपडेट का इस्तेमाल करते हैं।
आसमान से पाताल तक पहुंचना लक्ष्य
मंत्री ने डीप ओशन मिशन को संभावित क्रांतिकारी बदलाव बताया। उन्होंने कहा कि भारत की अनन्वेषित (बिना खोज की गई) समुद्री संपदा भविष्य की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक बन सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारा लक्ष्य अगले साल गगनयान के ज़रिए एक भारतीय को अंतरिक्ष में भेजना है, उसी तरह हम जल्द ही समुद्रयान के ज़रिए भारतीयों को समुद्र तल से 6 किलोमीटर नीचे गोता लगाते हुए देख सकते हैं। एक ऊपर, एक नीचे-यही हमारा अन्वेषण लक्ष्य है।
क्या है डीप ओशन मिशन
डीप ओशन मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में मौजूद संसाधनों की खोज करना, संधारणीय समुद्री विकास को बढ़ावा देना और महासागरों से संबंधित विभिन्न प्रौद्योगिकियों का विकास करना है। इस मिशन का लक्ष्य 6000 मीटर की गहराई तक समुद्र में जाना और वहां मौजूद खनिजों, ऊर्जा स्रोतों और जैव विविधता का अध्ययन करना है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का बजट तीन गुना बढ़ा
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्रालय का बजट 2014 के 1,281 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 3,658 करोड़ रुपये हो गया है। इससे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं और उन्नत अनुसंधान को बल मिला है।
दो दिन पहले ही मिल जाएगी बाढ़ की सूचना
अब गांवों में भी बाढ़ की सूचना दो दिन पहले ही मिल जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने वेब-आधारित सी-फ्लड प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है। इसमें बाढ़ के नक्शे और जलस्तर की भविष्यवाणी की जाएगी। यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में दी।
- सी-फ्लड अपग्रेड 2डी हाइड्रोडायनामिक मॉडलिंग से प्राप्त बाढ़ के पानी की जानकारी को विस्तार और गहराई की जानकारी के साथ जुटाता है।
- इसे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय एजेंसियों से सभी नदी घाटियों के लिए उनकी संबंधित कार्य योजना के अनुसार बाढ़ मॉडलिंग आउटपुट को एकीकृत करने वाली -एक एकीकृत बाढ़ सूचना प्रणाली के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
- प्रारंभिक चरण में यह प्लेटफॉर्म गोदावरी, तापी और महानदी नदी घाटियों के लिए बाढ़ का पूर्वानुमान कवर करता है।
- वेब-पोर्टल प्रारंभिक चरण में तीन भाषाओं- हिंदी, अंग्रेजी और ओडिया में सूचना मिलेगी।
- यह बाढ़ की गहराई के आधार पर तीन श्रेणियों की बाढ़ चेतावनी इंगित करता है: येलो अलर्ट 0.5 मीटर से कम गहराई वाली बाढ़ को इंगित करता है, रेंज -अलर्ट 1.5 मीटर से कम गहराई वाली बाढ़ को इंगित करता है और रेड अलर्ट 1.5 मीटर से अधिक गहराई वाली बाढ़ को दर्शाता करता है।



