स्पेश मिशनः आसमान पर अरमान

भारत का स्पेस मिशन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। चंद्रयान के चौथे संस्करण चंद्रयान-4 मिशन पर इसरो का फोकस है। इसमें चांद के नमूनों का भंडारण तय होगा।

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नई दिल्ली:

आसमान में दुनिया की मौजूदगी जिस हिसाब से बढ़ रही है, उस पर यह शेर बखूबी से बैठता है। इस मिशन में भारत भी काफी आगे है। चंद्रयान मिशन से भारत ने दुनिया भर में उतनी उपस्थिति का लोहा मनवाया। अब वह चंद्रयान-4 समेत कई योजना पर काम कर रहा है।

चंद्रयान-4 मिशन

भारत चांद तक तो पहुंच गया है। अब वहां  की मिट्टी और पर्यावरण कैसी है, यह पता करेगा। इसके लिए भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो जुट गई है। चंद्रयान-4 मिशन पर काम कर रही है। इस मिशन के तहत चांद के नमूनों का सुरक्षित संचालन और भंडारण होगा। इसके लिए, रिसाव-रोधी नमूना डिब्बों को कन्टैमनेशन नियंत्रण सुविधाओं से युक्त नमूना संरक्षण सुविधा में स्थानांतरित किया जाएगा। 
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए नमूनों की इन्टेग्रिटी को बनाए रखने को अपग्रेडेड उपकरणों के साथ संरक्षण सुविधा (आईएसओ मानक के अनुसार श्रेणी 100 और 1000 स्वच्छ कक्ष वातावरण) की स्थापना की योजना बनाई गई है। कॉस्पर (अंतरिक्ष अनुसंधान समिति) ग्रह संरक्षण नीति के अनुसार चंद्र मिशन उस श्रेणी में आते हैं जहाँ जैविक कन्टैमनेशन के लिए कठोर आवश्यकताएं नहीं होती हैं।
चंद्रयान-4 मिशन में खास तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सटीक मिलन स्थल और डॉकिंग प्रणालियां, कक्षा प्रबंधन के लिए नेविगेशन और एटीट्यूड नियंत्रण, सैंपल कलेक्शन और सीलिंग के लिए रोबोटिक ड्रिल और स्कूप, सैंपल ट्रांसफर के लिए रोबोटिक आर्म, ऑटोनोमस एसेंट सिस्टम, पुनः प्रवेश मॉड्यूल के लिए हीट शील्ड तकनीक और चंद्र नमूना वापसी की चुनौतियों से निपटने के लिए डेलेरेशन प्रणालियां शामिल हैं।

स्पेश मिशन

  • दूसरा परीक्षण यान मिशन (TV-D2) – 2025 की तीसरी तिमाही।
  • गगनयान मिशन के अंतर्गत पहली मानवरहित कक्षीय उड़ान – 2025 की चौथी तिमाही।
  • दूसरी और तीसरी मानवरहित कक्षीय उड़ान (G2 और G3) – 2026।

गगनयान मिशन की वर्तमान स्थिति

  • मानव-चालित प्रक्षेपण यान (HLVM3): विकास और ग्राउंड टेस्टिंग हो चुकी है।
  • कक्षीय मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के लिए प्रोपल्शन सिस्टम विकसित और परीक्षण की गईं। ECLSS इंजीनियरिंग मॉडल साकार हुआ।
  • क्रू एस्केप सिस्टम (CES): 5 प्रकार की मोटरें विकसित और स्थैतिक परीक्षण की गईं।
  • अवसंरचना स्थापित: कक्षीय मॉड्यूल तैयारी सुविधा, गगनयान नियंत्रण केंद्र, गगनयान नियंत्रण सुविधा, चालक दल प्रशिक्षण सुविधा, द्वितीय प्रक्षेपण पैड सुधार।
  • पूर्ववर्ती मिशन: CES के सत्यापन के लिए एक परीक्षण वाहन विकसित किया गया और TV-D1 में उड़ान परीक्षण किया गया। TV-D2 और IADT-01 के लिए गतिविधियाँ प्रगति पर हैं।
  • उड़ान संचालन और संचार नेटवर्क: भू-नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन को अंतिम रूप दिया गया। IDRSS-1 फीडर स्टेशन और स्थलीय संपर्क स्थापित किए गए।
  • क्रू रिकवरी ऑपरेशन: रिकवरी एसेट्स को अंतिम रूप दिया गया। रिकवरी योजना तैयार की गई।
  • सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (SMPS): योग्यता परीक्षण कार्यक्रम सहित विकास कार्य पूरा हो गया।

पहला मानवरहित मिशन (G1)

C32-G चरण और CES मोटर्स का निर्माण पूरा हो गया। HS200 मोटर्स और CES फ़ोर, क्रू मॉड्यूल जेटिसनिंग मोटर तक पहुंच गए। क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल संरचना का निर्माण पूरा हो गया। क्रू मॉड्यूल फेज-1 की जांच पूरी हो गई।

गगनयान मिशन के फायदे

गगनयान की दिशा में स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास से निवेश आकर्षित होगा, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा। इससे फार्मास्यूटिकल, बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन, सामग्री विकास, कक्षा में विनिर्माण, अंतरिक्ष पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में नए नवाचारों और अनुसंधान के विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इसके लंबे समय तक आर्थिक लाभ होंगे। इस मिशन के लिए चुने गए वायु सेना के पायलटों का सामान्य प्रशिक्षण रूस में पूरा हो गया। गगनयान मिशन के लिए विस्तृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और सुविधाएं विकसित की गईं। वर्तमान में चयनित वायु सेना पायलटों के गगनयान-विशिष्ट प्रशिक्षण के तीन में से दो सेमेस्टर पूरे हो चुके हैं।

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