नई दिल्ली: कोशिकीय तनाव (cellular stress) को पहचानने में अहम रोल निभाने वाला प्रोटीन टीएके1 काइनेज प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यून रिस्पॉन्स), सूजन और कोशिकाओं के अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह विशेष मामलों में मूल स्तर पर उच्च संगठित परमाणुओं का निर्माण या ऐसी क्षमता विकसित कर सकता है। यह दावा है विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान बोस इंस्टीट्यूट की टीम का। प्रोफेसर शुभ्रा घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाली छात्रा निबेदिता राय चौधरी की टीम ने टीएके1 काइनेज पर काम किया। शोध किया कि क्या परमाणुओं के समूह से बना अणु बुनियादी स्तर पर बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहार का अनुकरण करता है।
एआई से लिया सहयोग
जर्नल ऑफ केमिकल इंफॉर्मेशन एंड मॉडलिंग में प्रकाशित यह खोज जैव-रासायनिक अनुसंधान एवं मशीन लर्निंग (एमएल) से की गई। यानी मशीन लर्निंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भी इस्तेमाल किया गया।
छद्म बुद्धिमत्ता भी है
बोस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के निष्कर्षों से पता चला है कि टीएके1 में यह आंतरिक वायरिंग न केवल इसे कार्यात्मक बनाती है बल्कि एक छद्म बुद्धिमत्ता भी उत्पन्न करती है, जो इसे संदर्भ-आधारित तरीके से अपनी मशीनरी तैनात करने में सक्षम बनाती है। अंतःक्रियाओं की आंतरिक वायरिंग टीएके1 के कार्य को सक्रिय करने के लिए अपने आंतरिक सर्किट के विभिन्न मार्गों के माध्यम से अन्य अणुओं द्वारा रासायनिक संशोधनों के साथ-साथ दूर से संवेदित भौतिक प्रेरण जैसे संकेतों को संसाधित कर सकती है।
- टीएके1 काइनेज प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, सूजन और यहां तक कि कोशिकाओं के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसलिए इसकी मशीनरी औषधि अणुओं के लिए एक लक्ष्य है।
- महत्वपूर्ण औषधि लक्ष्य की बुद्धिमान मशीनरी की पहचान खुद मानव के लिए भविष्य के अनुप्रयोगों की विशाल संभावनाएं खोलती है।
- यह जैव रासायन विज्ञान में विशेष कर अणु विशिष्ट मामलों में ‘अनुक्रम-संरचना-कार्य’ के सिद्धांत को ‘अनुक्रम-संरचना-कार्य-बुद्धिमत्ता’ की संभावना तक विस्तारित करने में मौलिक महत्व भी रखती है।
क्या होते हैं प्रोटीन और परमाणु
प्रोटीन हजारों से लेकर लाखों परमाणुओं से मिलकर बने होते हैं। यह अमीनो एसिड नामक यौगिकों की बहुलक श्रृंखलाओं का निर्माण करने के लिए सही तरीके से जुड़े होते हैं लेकिन वे कार्यात्मक रूप से तभी सक्रिय होते हैं जब ये शृंखलाएं एक विशिष्ट त्रि-आयामी सघन रूप में मुड़ जाती है जिसे मूल अवस्था कहते हैं। यह परमाणुओं के बीच असंख्य सूक्ष्म इलेक्ट्रोस्टैटिक अंतःक्रियाओं के निर्माण के माध्यम से होता है।
इस आंतरिक वायरिंग का सामूहिक पैटर्न एक विशिष्ट प्रोटीन के लिए अद्वितीय होता है जिसकी स्मृति उसके तथाकथित ‘प्राथमिक अनुक्रम’ में कोडित होती है और यह विकास के साथ अपडेट होती रहती है, जिससे नई विशेषताएं प्राप्त होती हैं।



