छत्तीसगढ़: छह राज्यों में आतंक पर्याय बना 1.80 करोड़ का ईनामी व केंद्रीय कमेटी का सदस्य सोनू दादा ऊर्फ भूपति ने अभी 14 अक्तूबर को अपने 61 साथियों के आत्मसर्पण किया। इसके बाद से नक्सलियों में बंदूक छोड़ने की लाइन लग गई। डर उनमें इस कदर घर कर गया है कि जिधर देखिए, वह आत्मसमर्पण को तैयार खड़े हैं। इसी का नतीजा है कि दो दिनों में 308 नक्सली आत्म समर्पण कर चुके हैं। इसमें 15 अक्तूबर को सुकमा में 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद कांकेर जिले के कोयलीबेडा के बीएसफ कैंप में रावघाट एरिया कमेटी के टॉप नक्सली लीडर राजू सलाम, मीना, प्रसाद, भास्कर समेत 100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। राजू सलाम एक माह से आत्म समर्पण के फिराक में था। गुरुवार को 120 नक्सलियों ने जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया है। वहीं, कांकेर बार्डर पर सोनू दादा समेत 61 ने समर्पण किया है। इस तरह कुल 308 नक्सली आत्मसर्मण कर चुके हैं।
कल दो सौ माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण
जानकार बताते हैं कि शुक्रवार को नक्सली प्रवक्ता और डीकेएसजेडसी सदस्य रूपेश ऊर्फ सतीश ऊर्फ आसन्ना अपने 200 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने जा रहा है। पहले की तरह यह समपर्ण भी माओवादियों के हिसाब से बनी दंडकारण्य समिति क्षेत्र में हो रहा है। इससे एक तरफ पुलिस जवानों के हौसले बुलंद हैं। जबकि माओवादियों में हलचल मची हुई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माओवादी अब अपना सेफ्टी प्वाइंट की तलाश कर रहे हैं। जैसे ही सेफ्टी प्वाइंट दिखता है, माओवादी अपने हथियार लेकर बाहर आ जाते हैं और आत्मसमर्पण कर देते हैं। इसका एक मात्र कारण है, उनमें फैली दहशत। अब आमजन भी सहयोग नहीं करते। आमजन में माओवादियों के प्रति बहुत भय भी नहीं रह गया है। इससे पुलिस को सूचनाएं मिल जाती हैं और माओवादियों के स्थल पर अटैक करने में पुलिस को काफी सहुलियत हो गयी है।
भयभीत हैं नक्सली
सुरक्षा बलों के नक्सल ऑपरेशन से नक्सली भयभीत और घबराये हुए हैं। लगातार सरेंडर कर रहे हैं। इसी क्रम में 17 अक्टूबर को जगदलपुर में देश का सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण होगा। नक्सली प्रवक्ता और डीकेएसजेडसी सदस्य रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्ना अपने 120 साथियों के साथ सरेंडर करेगा। यहां पर कुल 200 नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे। बड़ी और खास बात ये है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
आत्मसमर्पण के लिए पुलिस जगदलपुर लेकर आ चुकी है
इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें नक्सली इंद्रावती नदी पार उसपरी घाट पर दिख रहे हैं। नक्सली कमांडर रूपेश के नेतृत्व में सभी ने सरेंडर करने का फैसला लिया है। स्थानीय पुलिस नक्सलियों को हथियारों के साथ आत्मसमर्पण के लिए जगदलपुर लेकर आ चुकी है। प्रदेश के अंतागढ़, सुकमा के बाद अब बीजापुर से भी लाल आतंक का सफाया शुरू हो गया है।
खबर यह भी आ रही है कि माड़ डिवीजन के 120 से ज्यादा नक्सल आत्मसमर्पण करने के लिए जंगल से निकले हैं। इसके बाद उनके साथ कुछ दूसरे डिवीजन के भी माओवादी आत्मसमर्पण करने के लिए साथ आ गये। इन सरेंडर करने वाले नक्सलियों में रूपेश समेत कई ऐसे नक्सली हैं, जिन पर लाखों रुपये इनाम घोषित हैं। इसमें जोनल कमेटियों के दूसरे बड़े नक्सली भी शामिल हैं। जंगल से बाहर निकलने वाले नक्सलियों के लिए एक सब कॉरिडोर की व्यवस्था की गई थी। नक्सली प्रवक्ता रूपेश माड़ डिवीजन के स्पेशल जोनल कमेटी का मेंबर है।
चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
इन नक्सलियों में 80 से ज्यादा नक्सली हथियारों के साथ सरेंडर करेंगे। बताया जाता है कि नक्सलियों की पूरी माड़ डिवीजन की टीम इंद्रावती नदी पार करके भैरमगढ़ पहुंची। बीजापुर जिला प्रशासन ने रूपेश समेत समर्पण करने वाले नक्सलियों को लाने के लिए पूरी तैयारी की थी। इंद्रावती नदी से भैरमगढ़ तक चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच सभी नक्सली हथियार डालने के लिये पहुंचेंगे। किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को सील कर दिया है। भैरमगढ़ में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल की तैनाती की गई है।
नक्सली रूपेश ने पेशकश की शांतिवार्ता की
रूपेश नक्सली प्रवक्ता है। उसने ही हाल ही में प्रेसनोट जारी कर शांतिवार्ता की पेशकश की थी। प्रेसनोट में केंद्र सरकार से नक्सल विरोधी अभियान को छह महीनों के लिए रोकने की गुजारिश की थी, जिसे केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार ने सिरे से नकार दिया था। सरकार का कहना था कि गोली और बोली दोनों एक साथ नहीं हो सकता।
अब बात करते हैं सोनू दादा की
छह राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना केंद्रीय कमेटी का मेंबर सोनू दादा ऊर्फ भूपति ने अपने 60 साथियों के साथ सरेंडर किया था। यह सरेंडर उसने इन्काउंटर में मारे जाने के डर से किया है। भूपति पर कुल घोषित इनाम एक करोड़ अस्सी लाख रुपये था। इसमें छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 लाख, मध्यप्रदेश सरकार ने 15 लाख, ओडिशा ने 25 लाख, तलंगाना ने 25 लाख, आंध्र प्रदेश ने 25 और महाराष्ट्र ने 50 लाख रुपये इनाम रखे थे।
इसके सरेंडर से गढ़चिरौली डिविजन हुआ समाप्त प्राय
इसके सरेंडर और इसके साथियों के सरेंडर के साथ ही गढ़चिरौली से लेकर बस्तर संभाग तक का इलाका लगभग शांत हो गया। गढ़चिरौली डिविजन तो अब समाप्त प्राय हो गयी है। 15 अक्टूबर को ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंन्द्र फडनवीस गढ़चिरौली आने वाले हैं। उनके आने से पूर्व यह आत्मसर्पण माओवाद संगठन को समाप्त करने के अभियान की अहम सफलता है।
सरेंडर करने वाले सभी साथियों को मिलाकर छह करोड़ रुपये का था इनाम
भूपति के साथ ही जिन साठ साथियों ने आत्मसमर्पण किया है, उन सभी पर मिलाकर छह करोड़ रुपये का कुल इनाम घोषित था। नक्सलियों ने लगभग 50 हथियार भी गढ़चिरौली पुलिस के हवाले किए हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 3 एरिया मेंबर कमेटी और मेंबर और 10 डिविजन कमेटी मेंबर के सदस्य शामिल हैं।
सात एके 47 और नौ इंसास भी सौंपे पुलिस को
गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में सरेंडर करने वाला भूपति रणनीति बनाने का प्रमुख आदमी था। इसने अपने साथियों के साथ सरेंडर करने के दौरान सात एके 47 और नौ इंसास राइफल पुलिस को सौंपे। बड़ी नक्सली घटनाओं शामिल में रहा है। भूपति गढ़चिरौली में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर भी था। ये नक्सली हथियार समेत आत्मसमर्पण करने की बात पहले की कह चुके थे। सोनू दादा के बयान के बाद नक्सलियों में दो फाड़ हो गई थी। अब कई और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पुलिस की ओर से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ जारी की जा रही है।
असली नाम था मल्लोजूला वेणुगोपाल
तेलंगाना के ब्राह्मण परिवार में जन्मे सोनू दादा की उम्र 65 साल थी। इसका असली नाम मल्लोजूला वेणुगोपाल राव है। वहीं सोनू दादा के कई नाम भी हैं, जिसमें सोनू उर्फ विवेक उर्फ भूपति उर्फ अभय है। सोनू दादा ने बी काम करने के साथ ही आईटीआई भी कर चुका था। सोनू दादा सीसीएम, पीबीएम, सीआरबी सचिव, प्रवक्ता सीपीआई माओवाद भी रह चुका था।
सुजाता भी थी नक्सली
नक्सली संगठन के शुरुआत से ही सोनू दादा उर्फ भूपति उसका बड़ा भाई किशन जी, भाभी सुजाता के अलावा सोनू दादा की पत्नी जुडी हुई थी, जहां लंबे समय से पूरा परिवार नक्सलियों की विचारधारा से जुड़कर काम कर रहे थे। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर के अलावा राज्य हर बड़ी घटनाओं में शामिल थे। धीरे-धीरे इनका नाम हर जगह गूंजने लगा।
दंतेवाड़ा में भी 71 नक्सलियों ने किया था आत्म समर्पण
इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसमें 21 महिला नक्सली और 50 पुरुष नक्सली शामिल थे। सरेंडर करने वाले 30 नक्सलियों पर 64 लख रुपए का इनाम था। डेढ़ साल में करीब 400 नक्सली मारे गए हैं। इनमें बस्तर के नक्सली ज्यादा हैं।



