नई दिल्ली | आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने देश में गहराते गैस संकट को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर चौतरफा हमला बोला है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सरकार के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा है कि देश में गैस की कोई किल्लत नहीं है।
संजय सिंह ने कड़े लहजे में पूछा कि अगर सब कुछ सामान्य है, तो देश की जनता कड़कती धूप में सिलेंडरों के लिए लंबी लाइनों में क्यों खड़ी है?
संकट आया नहीं, मोदी खुद लाए हैं
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गैस संकट प्राकृतिक नहीं है, बल्कि सरकार की गलतियों का नतीजा है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को युद्ध से ठीक दो दिन पहले इजरायल जाने की क्या जरूरत थी? ईरान जैसे पुराने और भरोसेमंद मित्र से रिश्ते खराब कर मोदी ने देश को संकट में डाल दिया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका और इजरायल के दबाव में काम कर रही है, जिसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज) में भारतीय जहाजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कालाबाजारी और बंद होते उद्योग
सांसद ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि आज गैस सिलेंडर 7 से 10 हजार रुपये में ब्लैक में बिक रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन, कई हॉस्टल और होटलों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात के मोरबी में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और दूसरी तरफ सरकार के प्रवक्ता इसे विपक्ष का एजेंडा बताकर लोगों का मजाक उड़ा रहे हैं।
संसद में बजट और ‘झूठ’ की राजनीति
संजय सिंह ने सोमवार को संसद में पास हुए 2,81,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का हवाला देते हुए पूछा कि इसमें से 57 हजार करोड़ रुपये ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ के नाम पर क्यों रखे गए हैं?
उन्होंने कहा, “भाजपा और उनके समर्थक सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहे हैं कि समुद्री मार्ग खुल गया है और मोदी जी ने कूटनीतिक जीत हासिल की है। अगर जहाज आ रहे हैं, तो गैस की किल्लत क्यों बनी हुई है? सच तो यह है कि अभी भी 22 जहाज फंसे हुए हैं।”
अडानी को फायदा और ‘एपस्टीन फाइल्स’ का दबाव
प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस आपदा को प्रधानमंत्री के ‘मित्र’ अडानी के लिए अवसर में बदल दिया गया है, जो अब तीन गुना महंगे दामों पर गैस बेच रहे हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री ‘एपस्टीन फाइल्स’ के किसी गुप्त दबाव में हैं, जिसके कारण वे देश के हितों की बलि देकर अमेरिका और ट्रंप की हर बात मान रहे हैं?
समाधान: रूस और ईरान से सीधा संवाद
संजय सिंह ने मांग की कि सरकार को अपने अहंकार को त्याग कर तुरंत ईरान और रूस से बात करनी चाहिए। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि अमेरिका से गैस मंगाना 8 गुना महंगा पड़ता है और इसमें 30-40 दिन लगते हैं, जबकि ईरान से महज 4-7 दिन में गैस भारत पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर चीन और रूस के जहाज सुरक्षित निकल रहे हैं, तो भारत के क्यों नहीं? सरकार को ‘विश्व गुरु’ का चोला छोड़कर देश की जनता को इस महंगाई और किल्लत से निजात दिलानी चाहिए।



