नई दिल्ली: यमुना नदी को प्रदूषण और पारिस्थितिक संकट से उबारने के लिए दुनिया में अपनी तरह की पहली और ऐतिहासिक पदयात्रा की शुरुआत 29 जनवरी को उत्तर प्रदेश के जालौन ज़िले स्थित पचनद से होने जा रही है। इस यात्रा में देशभर की करीब 1000 जल सहेलियां हिस्सा लेंगी, जो लगभग 500 किलोमीटर पैदल चलकर 26 फरवरी को दिल्ली पहुंचेंगी।
यह पदयात्रा परमार्थ समाज सेवी संस्थान, जल सहेली समिति और यमुना संसद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। यात्रा यमुना, चंबल, सिंध, पहुज और कुंवारी नदियों के संगम स्थल पचनद से शुरू होकर यमुना के किनारे-किनारे दिल्ली तक पहुंचेगी। अलग-अलग पड़ावों पर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियां भी यात्रा में शामिल होंगी।
आयोजकों के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य यमुना नदी के पारिस्थितिक संकट, प्रदूषण के स्रोतों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर जन-जागरूकता फैलाना है। साथ ही समाज की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए ठोस संवाद और समाधान खोजना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। जल सहेलियां प्रतिदिन करीब 15 से 17 किलोमीटर पैदल चलेंगी। यह भारत की सबसे बड़ी महिलाओं द्वारा संचालित नदी यात्राओं में से एक मानी जा रही है।
जल सहेली समिति के संस्थापक संजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा सरकारी प्रयासों से आगे बढ़कर एक जन-केंद्रित पहल है। महिलाओं के अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से नदी संरक्षण के व्यावहारिक समाधान सामने आएंगे। उन्होंने देश-विदेश के यमुना प्रेमियों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।
यमुना संसद के संयोजक रविशंकर तिवारी ने कहा कि पूरी दुनिया में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं एक महीने तक किसी नदी के लिए पदयात्रा करेंगी। इससे न सिर्फ नदी से जुड़े समाज में संवेदनशीलता बढ़ेगी, बल्कि यमुनोत्री से प्रयागराज तक यमुना के पुनरुद्धार का व्यापक आधार भी तैयार होगा।
यह यात्रा नमामि गंगे, यमुना एक्शन प्लान, जल जीवन मिशन और अमृत सरोवर जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सामाजिक और व्यवहारिक स्तर पर मजबूती देगी। यात्रा के दौरान नदी चौपालें, श्रमदान, घाटों की सफाई, वृक्षारोपण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवाओं और किसानों के साथ संवाद, तथा प्रदूषित नालों और निष्क्रिय तालाबों की पहचान जैसे कई गतिविधियां होंगी।
यात्रा का समापन दिल्ली में ‘यमुना पुनरुद्धार चार्टर’ के साथ होगा, जिसमें नदी संरक्षण और जलवायु प्रतिरोधकता को लेकर सामूहिक प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी। आयोजकों को उम्मीद है कि इस पहल से यमुना जलग्रहण क्षेत्र में लाखों लोग सीधे जुड़ेंगे और नदी संरक्षण को एक मजबूत जन आंदोलन का स्वरूप मिलेगा।



