नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला आंध्र प्रदेश के तिरुपति में संसद और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधानमंडलों की महिला सशक्तीकरण संबंधी समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। वह प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और एक स्मारिका का विमोचन भी करेंगे। इस दो दिवसीय सम्मेलन (14-15 सितंबर 2025) में पूरे देश से 100 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का विषय “उभरती प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना” है। “विकसित भारत के लिए महिलाओं के नेतृत्व में विकास” और दो उप-विषयों (i) ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव बजटिंग’ और (ii) ‘उभरती प्रौद्योगिकियों की चुनौतियों का सामना करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना’ को भी एजेंडा में शामिल किया गया है।
सम्मेलन में ये पहुंचेंगे
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नज़ीर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महिला सशक्तीकरण संबंधी संसदीय समिति की सभापति डी. पुरंदेश्वरी, आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी. अय्यन्नापत्रुडु और आंध्र प्रदेश विधान परिषद के सभापति कोये मोशेनु राजू उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री, विधान सभा और विधान परिषद के सदस्य व संसद और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधानमंडलों की महिला सशक्तीकरण संबंधी समितियों के सभापति और सदस्य इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।
इन मद्दों पर होगी बात
इस सम्मेलन में भारत में डिजिटल क्षेत्र में हो रही प्रगति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा के अवसरों और जोखिमों तथा महिलाओं पर उनके प्रभावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। ‘वर्ष 2047 तक विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए इस सम्मेलन में उभरती प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्थाओं में महिलाओं के समावेशन की रणनीतियों पर विचार किया जाएगा ।
-डिजिटल क्षेत्र में महिला-पुरुष अंतराल को दूर करने
-STEM क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने
-डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने और उद्यमिता एवं नवाचार में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने पर विशेष रूप से जोर दिया जाएगा।
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नेतृत्व के लिए तैयार होंगी महिलाएं
तिरुपति में आयोजित किया जा रहा महिला सशक्तीकरण संबंधी समितियों का यह पहला सम्मेलन, महिला सशक्तीकरण पर राष्ट्रीय संवाद का प्रतीक है, जिसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी परिवर्तन के युग में महिलाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करना है।



