नई दिल्ली: इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्र सरकार के विभागों की कुल 30 झांकियां हिस्सा लेंगी। इन झांकियों की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र वंदे मातरम् एवं समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत’ रखी गई है।
झांकियों में भाग लेने वाले राज्य और विभाग
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित मुख्य विषय के साथ, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की 30 झांकियां एकता, आत्मनिर्भरता और समावेशी राष्ट्रीय प्रगति को प्रदर्शित करेंगी। अपनी झांकी प्रस्तुत करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, नगालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।

वायु सेना मुख्यालय, नौसेना मुख्यालय, सैन्य मामलों के विभाग, संस्कृति मंत्रालय, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, आयुष मंत्रालय, गृह मंत्रालय (एनडीएमए- एनडीआरएफ), गृह मंत्रालय (बीपीआरडी), आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (सीपीडब्ल्यूडी), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भी अपनी झांकियां प्रस्तुत करेंगे।
भाग नहीं लेने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
इस बार झांकियों में हिस्सा न लेने वाले प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, मेघालय, झारखंड, गोवा, दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। पिछले दो दशकों में सात बार अपनी झांकी पेश कर चुकी दिल्ली का का चयन इस बार नहीं हुआ।
बिहार की झांकी मखाना, परंपरा, परिश्रम और प्रगति की कहानी

इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय है- “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”। बिहार का सफेद सोना यानी मखाना आज मिथिलांचल के पोखर से निकलकर ‘सुपरफूड’ पहचान के साथ दुनिया की थाली में परोसा जा रहा है। यह लोकल हुनर का ग्लोबल चेहरा है। मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल बीज भी कहा जाता है, मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर आज वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है। भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85–90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दी है ।
झांकी की दृश्य संरचना में झांकी दो भागों में मखाना की पूरी यात्रा को दर्शाती हैI कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद “लावा मखाना”, आगे जीआई टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर। दूसरे खंड में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक की पूरी प्रक्रिया। एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला, दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से फोड़ता पुरुष—यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि यह विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
बिहार से विश्व तक झांकी का संदेश
भारत पर्व में बिहार की यह झांकी केवल मखाना की कहानी नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान आधुनिक तकनीक से जुड़कर स्थानीय आजीविकाओं को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचने का मार्ग देता है और किसान, महिला श्रमिक और छोटे उद्यमी विकास की मुख्यधारा बनते हैं। मखाना बोर्ड की स्थापना, निर्यात में वृद्धि, जीआई टैग की मान्यता और भारत पर्व में झांकी का प्रदर्शन मिलकर यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि बिहार का मखाना अब सिर्फ “तालाब का उत्पाद” नहीं, बल्कि “भारत की वैश्विक पहचान” की ओर अग्रसर है, जिसे भारत पर्व 2026 में बिहार की झांकी देश और दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी।



