नई दिल्ली: रसायन निर्यातकों ( Chemical Exporters) को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने अधिसूचित क्यूसीओ उत्पादों के लिए निर्यात देयता अवधि को वर्तमान 6 महीने से बढ़ाकर 18 महीने कर दिया है।
यह पहल वस्त्र मंत्रालय जैसे अन्य मंत्रालयों के अंतर्गत अधिसूचित क्यूसीओ के लिए किए गए इसी तरह के समायोजन के बाद आई है, जहां समय-सीमा को बढ़ाकर 18 महीने कर दिया गया था। यह पहल पूरे भारत में रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स के निर्यातकों को महत्वपूर्ण सहायता और मजबूती प्रदान करती है। यह कदम व्यापार को सुगम बनाने और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कितना अहम है यह कदम
अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत आयातक निर्यात उत्पादन के लिए शुल्क-मुक्त कच्चा माल आयात कर सकते हैं और ये कच्चे माल गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) के अधीन नहीं होते, जिससे निर्यात गतिविधियों की निरंतरता सुनिश्चित होती है। इनमें से बड़ी संख्या में कच्चे माल रासायनिक क्षेत्र को दिए गए हैं, जो इस नीतिगत बदलाव के महत्व को दर्शाता है।
भारत सरकार एक विशिष्ट रणनीति के माध्यम से रसायन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और आर्थिक विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र का निर्यात 46.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया जो देश के कुल निर्यात मूल्य का 10.6 प्रतिशत है, जिससे इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और भी पुष्ट होती है।
कच्चे माल की लागत का दबाव होगा काम
यह कदम कच्चे माल की लागत से उत्पन्न वित्तीय दबाव को कम करने, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और भारतीय रासायनिक उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धी स्थिति को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग और डीजीएफटी की पहल एक दूरदर्शी और रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।



