नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने साइक्लोन मोंथा को लेकर कमर कस ली है। ट्रेनों को सुरक्षित चलाने के लिए अलर्ट जारी किया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रेलवे की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेनों के सुचारू संचालन और आपदा के बाद सेवाओं की जल्द बहाली को लेकर विस्तृत चर्चा की।
सभी रेलवे जोन हाई अलर्ट पर
केंद्रीय मंत्री ने सभी रेलवे जोनों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि चक्रवात के दौरान निर्बाध संचार प्रणाली और आपदा प्रतिक्रिया टीमों की समय पर तैनाती बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि चक्रवात गुजरने के तुरंत बाद ट्रेन सेवाओं की बहाली में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
रेलवे ने ‘वार रूम’ किए सक्रिय
भारतीय रेलवे ने चक्रवात ‘मोंथा’ के प्रभाव की वास्तविक समय में निगरानी और प्रतिक्रिया के लिए सभी प्रभावित क्षेत्रों में मंडलीय ‘वार रूम’ सक्रिय कर दिए हैं। इन वार रूम्स के जरिए रेलवे अधिकारियों को लगातार मौसम की स्थिति और ट्रेनों की सुरक्षा की जानकारी मिलती रहेगी।
प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में विशेष सतर्कता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चक्रवात का सबसे अधिक असर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के तटीय इलाकों पर पड़ने की आशंका है। इसलिए रेलवे ने इन राज्यों के स्टेशनों, पुलों और ट्रैक पर विशेष निगरानी रखी है।
विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और गुंटूर में तैयारी
रेलवे ने विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और गुंटूर मंडलों में आवश्यक मशीनरी, सामग्री और मानव संसाधन को पहले से तैयार रखा है ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए ट्रेनों के संचालन पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर किसी क्षेत्र में चक्रवात का असर अधिक होता है, तो ट्रेनों का मार्ग बदला जा सकता है या सेवाएं अस्थायी रूप से रोकी जा सकती हैं।
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तीन प्रमुख जोन पूरी तरह सक्रिय
पूर्व तटीय रेलवे, दक्षिण तटीय रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे जोन को आपातकालीन तैयारी और सुरक्षा उपायों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्व तटीय रेलवे के महाप्रबंधक परमेश्वर फुंकवाल ने मंत्री वैष्णव को बताया कि वाल्टेयर और खुर्दा रोड मंडलों में पहले से ही कई एहतियाती कदम उठाए जा चुके हैं, ताकि चक्रवात के प्रभाव से रेलवे सेवाओं पर न्यूनतम असर पड़े।



