बजट खर्च करने में भी रेलवे ने छह महीने में दिखाई रफ्तार

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रेलवे ने इस साल अपने बजट खर्च करने के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। उसने लगभग छह महीने में ही बजट में दी गई रकम में से आधी से अधिक खर्च कर ली है। बजट की रकम खर्च करने के मामले में ये अब तक का रेलवे का सबसे बेहतरीन रिकॉर्ड है। इनमें सबसे अधिक पैसा सेफ्टी से जुड़े कार्यों पर किया गया है।

गौरतलब है कि इस साल बजट में रेलवे को दो लाख 52 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। रेलवे सत्रों का कहना है कि अब तक रेलवे इसमें से 56.5 फीसदी रकम खर्च कर चुका है यानी बजट में जितने कामों के लिए पैसा आवंटित किया गया था, उनमें से आधी राशि खर्च करके काम किए गए हैं। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक दो लाख 52 हजार 200 करोड़ रुपये में से सितंबर महीने के अंत तक एक लाख 42 हजार 487 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

सेफ्टी के कामों पर 56 फीसदी खर्च

सबसे महत्वपूर्ण काम सेफ्टी से जुड़े किए गए हैं। इनमें ट्रेनों को टक्कर से बचाने के लिए कवच लगाना भी शामिल है। बजट में रेल लाइनों पर कवच के अलावा रेल ओवर ब्रिजों के साथ ही लेवल क्रॉसिंग और ट्रैक बदलने जैसे कामों के लिए बजट में 39 हजार 456 करोड़ रुपये रखे गए थे। इनमें से रेलवे ने 56 फीसदी रकम यानी 22,286 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

क्षमता बढ़ाने पर जोर

रेलवे सूत्रों का कहना है कि इसी तरह रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ाने, गेज कन्वर्जन और इलै क्टिफिकेशन जैसे कामों के लिए बजट में एक लाख 9 हजार 986 करोड़ रुपये दिए गए थे। इनमें से भी रेलवे 49 फीसदी रकम का इस्तेमाल कर चुका है।

यात्री सुविधाओं के लिए बजट का 49 फीसदी खर्च

इसी तरह से पैसेंजरों से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट में 12 हजार करोड़ रुपये काप्रावधान किया गया था। इसमें से 49 फीसदी राशि का उपयोग किया गया है जबकि रोलिंग स्टॉक यानी कोच निर्माण और उनकी मरम्मत आदि के कामों के लिए भी 56, 993 करोड़ रुपये में से 46 फीसदी राशि खर्च की गई है।

Gulshan Rai Khatri

gulshanraikhatri@gmail.com

गुलशन राय खत्री 35 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता में हैं। दैनिक जागरण और जनसत्ता में रिपोर्टिंग के बाद नवभारत टाइम्स में लगभग 33 साल तक पत्रकारिता की। सिटी रिपोर्टिंग के अलावा नवभारत टाइम्स के नैशनल ब्यूरो में रहते हुए नैशनल बीजेपी, रेलवे, शहरी विकास, रोड ट्रांसपोर्ट जैसे कई मंत्रालयों की रिपोर्टिंग की। बाद में 6 साल नवभारत टाइम्स में मेट्रो एडिटर रहने के बाद रिटायर हुए। अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं और न्यूजी इंडिया के लिए भी लिखते हैं।

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