नई दिल्ली। पंजाब में दल-बदल के मुद्दे को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर राज्यसभा के उन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग की, जिन्होंने कथित रूप से दल-बदल किया है। इस दौरान वह पंजाब के विधायकों के साथ दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा।
विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने सभी विधायकों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंपा है और इस मामले में तत्काल कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में भाजपा के केवल दो विधायक होने के बावजूद उसके राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
‘इलेक्टेड नहीं, सेलेक्टेड सांसद’
मुख्यमंत्री ने दल-बदल करने वाले सात सांसदों को ‘इलेक्टेड नहीं, बल्कि सेलेक्टेड’ बताते हुए उनके कदम को पंजाब के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर इन सांसदों में नैतिकता है तो उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना चाहिए।
‘ऑपरेशन लोटस’ पर निशाना
भगवंत मान ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसी रणनीतियां पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था में सुधार के लिए संविधान में संशोधन कर सांसदों को वापस बुलाने (राइट टू रिकॉल) का प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि जनता के विश्वास को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
मान ने कहा कि भाजपा में शामिल होने से किसी को सुरक्षा नहीं मिलती और अगर किसी ने गलत काम किया है तो पंजाब सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
‘पंजाब में नहीं चलेगी दबाव की राजनीति’
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पंजाब के लोग किसी भी तरह के दबाव या धमकी के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य के लोग ऐसे नेताओं को जवाब देंगे, जिन्होंने जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पंजाब के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रहेगा।



