नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) की फायरब्रांड नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी इन दिनों अपनी ही पार्टी के रुख से अलग राह पकड़ती नजर आ रही हैं।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (2026) के लोकसभा में गिर जाने के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, उसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी लाइन से हटकर उन्होंने इस बिल के पारित न होने को भारतीय महिलाओं के लिए एक ‘दुखद दिन’ करार दिया है।
संविधान पर हमला
हैरानी की बात यह है कि जहां उद्धव ठाकरे गुट और विपक्षी गठबंधन इस विधेयक को ‘संविधान पर हमला’ बताकर इसका विरोध कर रहे थे, वहीं प्रियंका चतुर्वेदी की भाषा मोदी सरकार के सुरों से मिलती-जुलती दिखाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट रूप से अपनी निराशा जाहिर करते हुए लिखा कि यह उन महिलाओं के लिए बड़ा झटका है जो खुद को नीति-निर्माण की मुख्यधारा में देखना चाहती थीं।
प्रियंका का तीखा पलटवार
प्रियंका के इस बदले हुए रुख पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी चुटकी लेना शुरू कर दिया है। एक यूजर ने जब उन पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने दोबारा “राज्यसभा जाने के लिए बैटिंग शुरू कर दी है,” तो प्रियंका ने भी तीखा पलटवार किया। उन्होंने खुद को एक ‘ऑलराउंडर’ बताते हुए तंज कसने वालों को करारा जवाब दिया। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद से प्रियंका के तेवरों में आई यह नरमी किसी बड़े सियासी बदलाव का संकेत हो सकती है।
Sad day for India’s women who hoped to find themselves in the parliament or assembly. pic.twitter.com/Ln95uAPrvy
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 17, 2026
विपक्ष की जीत
लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ को पारित करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) नहीं मिल पाया। पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। सरकार ने जहां विपक्ष पर ऐतिहासिक मौका गंवाने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने इसे अपनी जीत बताया। ऐसे माहौल में प्रियंका चतुर्वेदी का अपनी पार्टी के विपरीत रुख अपनाना आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और दिल्ली की राजनीति में क्या मोड़ लाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।



