नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कर्नाटक के कारवार स्थित नेवल बेस पर कलवरी क्लास की पनडुब्बी आईएनएस वाघषीर में यात्रा की। इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी भी उनके साथ मौजूद रहे। यह राष्ट्रपति मुर्मू की कलवरी क्लास पनडुब्बी में पहली यात्रा है, जबकि किसी भारतीय राष्ट्रपति की यह दूसरी पनडुब्बी यात्रा मानी जा रही है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने फरवरी 2006 में पनडुब्बी में यात्रा की थी।
नौसेना की वर्दी में राष्ट्रपति
राष्ट्रपति नौसेना की वर्दी में पनडुब्बी के भीतर पहुंचीं। आईएनएस वाघषीर को जनवरी 2025 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह प्रोजेक्ट-75 (स्कॉर्पीन) के तहत बनी छठी और अंतिम पनडुब्बी है। इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू भारतीय वायुसेना के राफेल और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति भी रह चुकी हैं।
4 साल पहले हुआ था लॉन्च
आईएनएस वाघषीर को चार वर्ष पहले मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड से लॉन्च किया गया था। यह अत्याधुनिक नेविगेशन और ट्रैकिंग सिस्टम से लैस डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है, जिसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। प्रोजेक्ट-75 के तहत अब तक पांच आधुनिक पनडुब्बियां नौसेना में तैनात की जा चुकी हैं, जिनमें वाघषीर अंतिम इकाई है।
आईएनएस वाघषीर की खासियत
इस पनडुब्बी में चार एमटीयू 12V 396 SE84 डीजल इंजन और 360 बैटरी सेल्स लगे हैं। यह सतह पर 20 किलोमीटर प्रति घंटा और पानी के भीतर 37 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है। सतह पर 15 किमी प्रति घंटा की गति से यह करीब 12 हजार किलोमीटर तक चल सकती है, जबकि पानी के भीतर 7.4 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से इसकी रेंज लगभग 1020 किलोमीटर है।
एंटी-शिप मिसाइल दागने की क्षमता
करीब 221 फीट लंबी यह पनडुब्बी सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियान, खुफिया जानकारी एकत्र करने, समुद्री निगरानी और बारूदी सुरंग बिछाने में सक्षम है। वाघषीर 50 दिनों तक पानी के भीतर रह सकती है और अधिकतम 350 फीट की गहराई तक जा सकती है। इसमें 8 अधिकारी और 35 नौसैनिक तैनात किए जा सकते हैं। साथ ही इसमें एंटी-टॉरपीडो काउंटर मेजर सिस्टम, छह टॉरपीडो ट्यूब और एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल दागने की क्षमता भी मौजूद है।



