नई दिल्ली: भारत के सार्वजनिक प्रसारक, प्रसार भारती ने अपनी पारंपरिक छवि को बदलते हुए ‘डिजिटल-फर्स्ट’ कंटेंट रणनीति को पूरी तरह अपना लिया है। राज्यसभा में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रसार भारती अब केवल टीवी और रेडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दे रहा है।
‘Waves’ OTT और पे-पर-व्यू फ्रेमवर्क
प्रसार भारती की कंटेंट सोर्सिंग पॉलिसी 2024 के तहत अब आकाशवाणी और दूरदर्शन के साथ-साथ ‘Waves’ ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से कंटेंट तैयार और जुटाया जा रहा है। 2025 में लॉन्च किए गए पे-पर-व्यू (Pay-per-View) फ्रेमवर्क ने इस बदलाव में मुख्य भूमिका निभाई है। यह मॉडल न केवल आधुनिक दर्शकों को उनकी पसंद का कंटेंट उपलब्ध करा रहा है, बल्कि प्रसार भारती को एक प्रतिस्पर्धी डिजिटल खिलाड़ी के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
बदली तकनीक: अब अनिवार्य होगा इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर
प्रसार भारती ने तकनीकी क्षेत्र में एक और बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की नई अधिसूचना के अनुसार, अब भारत में बिकने वाले सभी टेलीविजन सेटों में इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर (Built-in Satellite Tuner) होना अनिवार्य कर दिया गया है।
- फायदा: अब उपभोक्ताओं को डीडी फ्री डिश के चैनलों का लाभ उठाने के लिए अलग से सेट-टॉप बॉक्स (STB) की आवश्यकता नहीं होगी।
- इसके चलते सरकार ने अब पुराने एसटीबी वितरण के प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया है।
पूर्वोत्तर में रिक्तियां और संपत्ति का मुद्रीकरण
संसदीय सत्र के दौरान मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में उत्तर पूर्वी क्षेत्र (North East) में प्रसार भारती के पास बड़ी संख्या में कार्यबल की कमी है। दूरदर्शन में 1994 और आकाशवाणी (AIR) में 1636 रिक्तियां मौजूद हैं। इसके अलावा, प्रसार भारती अपनी खाली भूमि संपत्तियों से राजस्व बढ़ाने के लिए संपत्ति मुद्रीकरण (Monetization) की योजना पर भी काम कर रहा है, जिसके लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी को नियुक्त किया गया है।



