नई दिल्ली: भारत सरकार की नीतियों की वजह से भारत विदेशी निवेश का हब बनता जा रहा है। इसका अंदाजा जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जेईटीआरओ) की एक रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इसके मुताबिक, दुनिया भर की 80% फीसदी कंपनियां भारत में अपना विस्तार करना चाहती है। वहीं, 75% कंपनियां पहले से ही यहां लाभ में अपना व्यापार कर रही हैं। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय जापान यात्रा अहम है। इसके बाद वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने चीन जाएंगे।
जापान के टोक्यो पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों को बताया कि किस तरह भारत में इन दिनों निवेश से लेकर व्यापार करने तक का यही समय है और सही समय है। व्यापार की राह को आसान बनाने के लिए सिंगल डिजिटल विंडो अप्रूवल की व्यवस्था की गई है। 45,000 से ज्यादा अनुपालनों को इस सरकार ने खत्म किया है जिसका सीधा लाभ व्यापारी वर्ग और उद्योगपतियों को मिल रहा है और इससे भारत की आर्थिक ताकत बढ़ रही है। मेड इन इंडिया और मेड वाई इंडियन के कांसेप्ट को बल दिया जा रहा है। इसी क्रम में डिफेंस और स्पेस जैसे सेंसिटिव क्षेत्रों को भी निजी क्षेत्रों के लिए खोलने का निर्णय लिया गया है। आने वाले समय में न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र को भी निजी क्षेत्र के लिए खोला जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक एक अहम पार्टनर रहा है। मेट्रो से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्ट-अप तक हर क्षेत्री में भारत-जापान की साझेदारी और विश्वास बढ़ा है।
पीएम मोदी ने कहा जापानी कंपनियों ने भारत में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। महज पिछले दो वर्ष में ही 13 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हुआ है। जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल कॉपरेशन (जेबीआईसी) का कहना है कि भारत सबसे प्रोमिसिंग डेस्टिनेशन है जबकि जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जेईटीआरओ) ने कहा है कि 80 प्रतिशत कंपनियां भारत में अपना विस्तार करना चाहती है जबकि 75 % कंपनियां मुनाफे में है। इसकी वजह है भारत में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता, पारदर्शी नीतियां। इन्हीं वजहों से आज भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत बन रही है और वैश्विक ग्रोथ में भारत 18% योगदान दे रहा है। भारत में करीब 700 बिलियन डॉलर के फॉरन रिजर्व है।
पीएम मोदी के सुझाव
- Manufacturing और Autosector में दोनों देशों की भागीदारी सफल रही है। अब बैटरी, रोबाटिक्स, सेमी-कन्डक्टर, शिप-बिल्डिंग और न्यूक्लियर एनर्जी में भी इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
- Technology और Innovation का जापान “टेक पावरहाउस” है जबकि भारत “टैलेंट पावर हाउस’। भारत ने AI, सेमीकन्डक्टर, क्वांटम कम्प्यूटिंग, Biotech और Space में मजबूत और दूरदर्शी पहल किए गए हैं।
- Green Energy Transition में भारत तेजी से 2030 तक 500 गीगावाट renewable energy के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर का भी लक्ष्य रखा है। इस क्षेत्र में साझेदारी की अपार संभावनाएं हैं।
- पिछले एक दशक में, भारत ने Next जेनरेशन मोबिलिटी और logistics infrastructure में अभूतपूर्व प्रगति की है। Ports की क्षमता दोगुनी हुई है। इस क्षेत्र में भी भविष्य के विस्तार पर सहयोग संभव है।
- भारत का स्किल्ड युवा talent वैश्विक जरूरतें पूरी करने की क्षमता रखता है। इसका लाभ जापान भी उठा सकता है। भारतीय talent को जापानी भाषा और soft skills में ट्रेनिंग देकर एक जापान के लिए ready workforce तैयार किया जा सकता है।



