पटना: भारतीय रेलवे ने पूर्वी भारत में रेल यातायात को सुचारु बनाने और ट्रेनों की समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत, पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) स्टेशन से लेकर झाझा तक 17 हजार करोड़ रुपये की लागत से तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा रेल ट्रैक पर बढ़ते दबाव को कम करना और ट्रेनों की गति बढ़ाना है। इस परियोजना के लिए इंजीनियरिंग स्केल प्लान तैयार हो रहा है और बिहार सरकार से भी जमीन को लेकर सहमति बन गई है।
परियोजना का विवरण
रेलवे के अनुसार, डीडीयू से किऊल के बीच तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण होगा, जबकि किऊल से झाझा के बीच केवल तीसरी लाइन बिछाई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए रेलवे ने इंजीनियरिंग स्केल प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसमें जमीन अधिग्रहण और विभिन्न स्टेशनों के पास ट्रैक बिछाने की विस्तृत रूपरेखा शामिल है। रेलवे बोर्ड ने तीसरी लाइन बिछाने के लिए पहले ही सहमति दे दी है।
परियोजना के प्रमुख चरण इस प्रकार होंगे
- पंडित दीनदयाल उपाध्याय से पटना तक: तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा।
- राजेंद्रनगर से फतुहा तक: तीसरी लाइन का निर्माण होगा।
- नेऊरा-जटडुमरी-दनियावां के रास्ते फतुहा तक: चौथी लाइन बिछाई जाएगी।
- फतुहा से किऊल तक: तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा।
- किऊल से झाझा तक: केवल तीसरी लाइन का निर्माण होगा।
राज्य सरकार का सहयोग और जमीन अधिग्रहण
हाल ही में, रेलवे और बिहार सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें इस परियोजना पर सहमति बनी। बैठक में यह तय किया गया कि गुलजारबाग और पटना साहिब स्टेशनों के बीच बिहार सरकार रेलवे को लगभग 4 मीटर जमीन देगी। इस जमीन का उपयोग तीसरी लाइन के निर्माण के लिए किया जाएगा। साथ ही, आवागमन को सुचारू रखने के लिए एक समानांतर एलिवेटेड सड़क और 3.5 मीटर का सर्विस रोड भी बनाया जाएगा। इस सहयोग से परियोजना में तेजी आने की उम्मीद है।
क्यों जरूरी है यह परियोजना
वर्तमान में, झाझा से डीडीयू के बीच प्रतिदिन 280 से 292 ट्रेनें गुजरती हैं, जो दोहरी लाइन की क्षमता से कहीं अधिक है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन से ट्रैक पर दबाव और बढ़ जाता है, जिससे कई ट्रेनें विलंब से चलती हैं। रेलवे का मानना है कि तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और यात्रियों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह योजना न केवल बिहार बल्कि पूर्वी भारत के पूरे रेल नेटवर्क के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगी।



