पटना। जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने राजधानी पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा बम फोड़ा है। उन्होंने डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर हमला करते हुए उन्हें हत्याकांड में शामिल होने का आरोप लगाया है। प्रशांत का दावा है कि जब सम्राट चौधरी 26 साल के थे तो एक सामूहिक मर्डर केस में अभियुक्त रहे हैं।
तारापुर मर्डर केस में ऐसे बचे सम्राट
बकौल प्रशांत 1995 के तारापुर केस में सम्राट अभियुक्त थे। उन्होंने तब गलत उम्र का दस्तावेज बनाया और कोर्ट में जमा कराया। इससे उन्हें राहत मिल गई। 2020 के चुनावी हलफनामे में सम्राट चौधरी ने शपथ पत्र दाखिल किया, उसमें वो 51 साल के थे। इस हिसाब से देखें तो 1995 में सम्राट चौधरी 26 साल के हुए। सम्राट चौधरी को बर्खास्त करके जेल भेज देना चाहिए। पीके ने ये भी धमकी दी है कि अगर पुलिस सम्राट चौधरी को गिरफ्तार नहीं करेगी तो वो लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
सम्राट ने भी दिया जवाब
इधर सम्राट चौधरी ने पीके के आरोप पर जवाब देते हुए कहा है कि इस मामले में 1997-1998 में कोर्ट से वो बरी हुए थे। उनके ऊपर लगे आरोपों में दम नहीं था। पीके के पास कोई मुद्दा नहीं है तो परसेप्शन का खेल खेल रहे हैं। उनकी उम्र और नाम को लेकर विवाद पहले से सार्वजानिक हैं। लेकिन प्रशांत खोजी पत्रकार बन गए हैं।
7 कुशवाहों की हुई थी हत्या
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि तारापुर में 1995 में 7 लोगों की हत्या हुई। सातों कुशवाहा समाज से आते थे। सम्राट चौधरी पर आरोप नहीं लगे हैं, बल्कि वो अभियुक्त हैं। 24 अप्रैल 1995 में राकेश कुमार उर्फ़ सम्राट चौधरी ने CJM कोर्ट में बिहार बोर्ड का प्रवेश पत्र जमा किया। एडमिट कार्ड के मुताबिक नाम- सम्राट चंद्र मौर्य, पिता का नाम-शकुनि चौधरी और जन्मतिथि-1 मई 1981 था। रिजल्ट में वो फेल थे। कोर्ट ने उन्हें नाबालिग मानकर राहत दे दिया और जेल से निकाला गया। 2020 के चुनावी घोषणा पत्र में सम्राट अपना उम्र 51 साल बताते हैं। लिहाजा वो 1995 में 26 साल के थे। एक 26 साल के आदमी को कोर्ट ने गलत प्रमाणपत्र के आधार पर नाबालिग मान लिया और बरी कर दिया। इसको जेल में होना चाहिए था लेकिन यहां डिप्टी सीएम बनकर बैठा हुआ है।
शिल्पी गौतम मामला
प्रशांत ने सम्राट चौधरी को शिल्पी गौतम मर्डर और रेप केस में घेरा है। आरोप लगाए कि इस मामले में सम्राट का ब्लड सैंपल लिया गया था। यह केस बिहार की राजनीति का एक हाई-प्रोफाइल केस है। 3 जुलाई 1999 को राजधानी पटना के एक सरकारी क्वार्टर के गैराज में मारुति के अंदर दो बॉडी मिली थी। दोनों बॉडी अर्धनग्न अवस्था में थीं। एक बॉडी 23 साल की शिल्पी जैन और दूसरी उसके प्रेमी गौतम की थी।
साधु यादव का था गैराज
जिस गैराज में यह बॉडी मिली थी, वह तत्कालीन सीएम राबड़ी देवी के भाई साधु यादव की थी। लड़की के बॉडी का जब पोस्टमॉर्टम किया गया तो गैंगरेप के निशान मिले। गौतम के शरीर पर चोट मिले। इससे साफ़ हो गया कि मामला सुसाइड का नहीं बल्कि हत्या और बलात्कार का है। यह केस CBI को दिया गया, इसमें भी रेप की पुष्टि हुई। जब साधु यादव ने डीएनए सैंपल मांगा गया तो, उन्होंने मना कर दिया।
2004 में बंद हुआ केस
2004 में सीबीआई ने इस केस को आत्महत्या मानते हुए बंद कर दिया। शिल्पी रेप और मर्डर केस का मामला आज भी विवादित है। प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले एक बार फिर इस मामले को हवा दे दिया है।
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