नई दिल्ली: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने Operation Sindoor की योजना और इसके पीछे की रणनीति पर पहली बार खुलकर बात की। आईआईटी मद्रास में अग्निशोध अनुसंधान प्रकोष्ठ के उद्घाटन के दौरान उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन शतरंज के खेल जैसा था, जहां हर कदम सोच-समझकर और अप्रत्याशित रूप से उठाया गया। यह पारंपरिक सैन्य कार्रवाई से अलग, ग्रे जोन में किया गया ऑपरेशन था, जो दुश्मन के लिए पूरी तरह चौंकाने वाला साबित हुआ।
शतरंज जैसी चाल, ग्रे जोन में हमला
जनरल द्विवेदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को ग्रे जोन में अंजाम दिया गया, जो न तो पूर्ण युद्ध था और न ही सामान्य सैन्य कार्रवाई। इसमें दुश्मन को यह अंदाजा तक नहीं था कि भारत अगला कदम क्या उठाएगा। उन्होंने कहा कि हमने शतरंज की तरह चाल चली, जहां नर्सरी और मास्टर्स जैसे कोडनेम वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह ऑपरेशन उरी और बालाकोट से कहीं अधिक गहरा और व्यापक था। इसकी वजह से पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ और वह हक्का-बक्का रह गया।
रक्षा मंत्री की स्पष्ट हरी झंडी
सेना प्रमुख ने खुलासा किया कि ऑपरेशन की शुरुआत 23 अप्रैल को हुई, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेना प्रमुखों ने निर्णायक कार्रवाई की जरूरत पर सहमति जताई। रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि अब बहुत हो चुका, कुछ करना होगा। सेना को पूरी छूट दी गई कि वह अपने हिसाब से लक्ष्य और रणनीति तय करे। इस स्पष्टता ने सेना को तेजी से और प्रभावी ढंग से काम करने की आजादी दी।
उरी और बालाकोट से अलग था ऑपरेशन सिंदूर
जनरल द्विवेदी ने बताया कि उरी हमले में लॉन्च पैड्स को निशाना बनाकर स्पष्ट संदेश दिया गया था, जबकि बालाकोट में पाकिस्तान के प्रशिक्षण शिविरों पर जवाबी कार्रवाई की गई थी। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दुश्मन के इलाके में गहराई तक हमला बोला। 25 अप्रैल तक उत्तरी कमान ने 9 में से 7 महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले की तैयारी पूरी कर ली थी और कई आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद इस ऑपरेशन ने पूरे देश को जोश से भर दिया।
देश को एकजुट करने वाला ऑपरेशन
सेना प्रमुख ने गर्व के साथ कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल दुश्मन को सबक सिखाया, बल्कि पूरे देश को एकजुट किया। उन्होंने कहा कि लोग पूछ रहे थे कि हम रुके क्यों? इसका जवाब हमारी कार्रवाई थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि अगर आप पाकिस्तान से पूछें कि वे जीते या हारे, तो वे कहेंगे कि उनका सेना प्रमुख फील्ड मार्शल बन गया, यानी वे हार को स्वीकार नहीं करेंगे। इस ऑपरेशन ने भारत की रणनीतिक ताकत और एकता को दुनिया के सामने साबित किया।



