नई दिल्ली: मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। यह पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) का जवाब था, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे। 7 मई की रात 1:05 से 1:30 बजे के बीच भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए। लक्ष्य जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों के कैंप थे। भारत ने साफ कहा कि कोई सैन्य या नागरिक सुविधा निशाना नहीं बनाई गई। इस ऑपरेशन से 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए, जिसमें जैश प्रमुख मसूद अजहर के 10 परिजन शामिल थे। भारत को 5 सैनिकों की हानि हुई, लेकिन पाकिस्तानी हमलों को नाकाम कर दिया। यह भारत की नई सैन्य रणनीति ‘आक्रामक रक्षा’ का प्रतीक बना।
सीडीएस का विशेष संबोधन
11 नवंबर 2025 को आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने ‘आधुनिक युद्ध पर तकनीक का प्रभाव’ विषय पर विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध का जीवंत उदाहरण है, जहां सटीक हमला क्षमता, नेटवर्क-केंद्रित संचालन, डिजिटल खुफिया जानकारी और बहु-क्षेत्रीय रणनीतियों को कम समय में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया गया। जनरल चौहान ने जोर दिया कि युद्ध मूल रूप से जीत हासिल करने का खेल है और तकनीक में अग्रणी बनना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने सैन्य नेतृत्व से विकसित वास्तविकताओं के अनुरूप तेजी से अनुकूलन की अपील की। उभरती तकनीकें, बदलते सिद्धांत और भू-राजनीतिक गतिशीलता से आधुनिक युद्ध नया रूप ले रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम का महत्व
यह आयोजन मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टूडीज एंड एनालिसिस (एमपी-आईडीएसए) द्वारा ‘नई उम्र की तकनीक से रक्षा क्षमता विकास’ थीम पर किया गया। यह संस्थान का 60वां स्थापना दिवस भी था। डायरेक्टर जनरल एमपी-आईडीएसए राजदूत सुजन चिनॉय ने स्वागत संबोधन में कहा कि तकनीक रक्षा क्षमताओं को नया आकार दे रही है। सेनाएं औद्योगिक युग से सूचना और साइबर युग में प्रवेश कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और क्वांटम भौतिकी जैसे क्षेत्र युद्ध में निर्णायक हो रहे हैं। उन्होंने विदेशी तकनीक खरीद और स्वदेशी विनिर्माण के बीच संतुलन पर जोर दिया। आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत स्वावलंबन जरूरी है।
चर्चाओं का फोकस
डायलॉग में नीति निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग नेता और शिक्षाविद् एकत्र हुए। चर्चाओं में नई तकनीकों से भारत की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर विचार-विमर्श हो रहा है। डेटा-आधारित रक्षा प्रणालियां और भविष्य की तकनीकी प्रगति पर फोकस है। जनरल चौहान ने रणनीतिक साझेदारियां और सशस्त्र बलों में संगठनात्मक बदलाव की जरूरत बताई। कार्यक्रम से डेटा-संचालित सिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी।
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भविष्य की दिशा
ऑपरेशन सिंदूर से साबित हुआ कि तकनीकी श्रेष्ठता ही युद्धक्षेत्र में जीत दिलाती है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ सैन्य जवाब को नई सामान्यता बना रहा है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में नवाचार को गति देगी। आत्मनिर्भरता से देश मजबूत बनेगा। चर्चाएं भारत को वैश्विक रक्षा शक्ति बनाने में योगदान देंगी।



