नई दिल्ली: बिहार के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में यह प्रवेश बिहार में एक नई सरकार के गठन का रास्ता साफ करेगा। गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे जदयू प्रमुख का हवाई अड्डे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भव्य स्वागत किया।
पत्रकारों से की बातचीत
हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश कुमार ने संक्षिप्त में कहा, “मैं यहां शपथ लेने के लिए आया हूं।” जानकारी के अनुसार, राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन उन्हें उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाएंगे। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में उनके दो दशक पुराने शासन के एक अध्याय का समापन माना जा रहा है।
14 अप्रैल को मिल सकता है बिहार को नया मुख्यमंत्री
नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, बिहार में एनडीए गठबंधन 14 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री का चुनाव कर सकता है। बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद का त्याग करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि बिहार में एनडीए की सरकार बनी रहेगी और वह पिछले 20 वर्षों से चल रहे ‘नीतीश मॉडल’ पर ही आगे बढ़ेगी।
विधान परिषद से दे चुके हैं इस्तीफा
नीतीश कुमार पहले ही बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। उन्होंने 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद 30 मार्च को अपना इस्तीफा सौंपा था। नियमों के मुताबिक, उच्च सदन के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर उन्हें राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी थी।
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने और मुख्यमंत्री पद छोड़ने के फैसले ने बिहार की सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि नीतीश कुमार की विरासत को पटना में कौन आगे बढ़ाएगा।



