नई दिल्ली | भारत सरकार की राजभाषा कार्यान्वयन नीति के अनुपालन को सुनिश्चित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान , नई दिल्ली द्वारा एक पूर्ण-दिवसीय ऑनलाइन हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र की प्रोफेसर वंदना झा और अंतर विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र के हिंदी अधिकारी डॉ. नागेंद्र शर्मा ने मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में शिरकत की।
विकसित भारत के लिए भाषा और स्वास्थ्य का संगम
कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के अधिष्ठाता प्रोफेसर वी. के. तिवारी के स्वागत वक्तव्य से हुआ। मुख्य अतिथि प्रोफेसर वंदना झा ने ‘हिंदी को हृदय का हार’ बताते हुए एक अत्यंत प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ की अवधारणा तभी सार्थक हो सकती है जब वास्तविक विकास भाषाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुँचे। उन्होंने विशेष रूप से चिकित्सा क्षेत्र में हिंदी पाठ्य-सामग्री की उपलब्धता की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रोफेसर झा ने अपने ग्रामीण अंचल के अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “आयुष्मान योजना सहित अनेक जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब जनसामान्य को उनकी अपनी भाषा में जानकारी उपलब्ध कराई जाए। शब्दावली और वाक्य निर्माण भारतीयता के भाव से ओत-प्रोत होने चाहिए।” उन्होंने भारतीय ज्ञानानुशासन की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यालयीन पत्राचार और व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के द्वितीय सत्र में आमंत्रित वक्ता नागेंद्र शर्मा ने कार्यालयीन पत्राचार के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. राजेश रंजन द्वारा उनके स्वागत के पश्चात, शर्मा ने विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से ‘टिप्पण एवं प्रारूपण’ लेखन को प्रतिभागियों के समक्ष अत्यंत सरल रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग सहज और सुगम बनाया जा सकता है।
संस्थान की सक्रिय भागीदारी
इस ऑनलाइन आयोजन में संस्थान के संकाय सदस्य, अनुसंधान अधिकारी, प्रशासनिक व तकनीकी अधिकारी और अन्य स्टाफ सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रभारी राजभाषा डॉ. गणेश शंकर श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यशाला के समापन पर प्रोफेसर अंकुर यादव ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।



