नई दिल्ली: नवाबगंज पक्षी अभयारण्य, उन्नाव के पास से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-25) पक्षियों के लिए खतरा बन रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में पाया गया कि इस क्षेत्र में सड़क यातायात से होने वाला शोर निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा है। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 26 सितंबर 2025 को NHAI को निर्देश दिया कि वह इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए तुरंत कदम उठाए। NGT ने साफ कहा कि पक्षी अभयारण्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शोर का स्तर नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि जैव विविधता को नुकसान न पहुंचे।
पहले क्या हुआ?
NGT ने इस मुद्दे को सबसे पहले अप्रैल 2024 में गंभीरता से लिया, जब UPPCB ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नवाबगंज के आसपास ध्वनि प्रदूषण मानकों से अधिक है। इसके बाद जुलाई 2024 में UPPCB ने एक और रिपोर्ट सौंपी, जिसमें इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। NHAI ने बताया कि अभयारण्य के आसपास ‘नो हॉर्निंग जोन’ के साइनबोर्ड लगाए गए हैं। साथ ही, उत्तर प्रदेश के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने अप्रैल 2022 में जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में ‘साइलेंस जोन’ घोषित करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा था।
‘साइलेंस जोन’ और निरीक्षण के प्रयास
16 जून 2024 को उन्नाव के जिलाधिकारी ने नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के 100 मीटर के दायरे को ‘साइलेंस जोन’ घोषित करने का प्रस्ताव दिया। इस प्रस्ताव को UPPCB ने 9 जुलाई 2024 को पर्यावरण विभाग को भेजा। इसके बाद 26 जून 2024 को एक संयुक्त समिति ने क्षेत्र का दौरा किया। जांच में पाया गया कि अभयारण्य से 66 मीटर दूर NH-25 और 83 मीटर दूर केवाना रोड ही ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में कोई अन्य शोर का स्रोत नहीं मिला।
समाधान के लिए उठाए जा रहे कदम
ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। उन्नाव वन विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि NH-25 के 41 से 43 किलोमीटर के हिस्से में 250 पाकड़ (पिलखन) के पेड़ लगाए जाएं। ये पेड़ प्राकृतिक ‘नॉइस बैरियर’ का काम करेंगे। इसके लिए ट्री गार्ड्स भी लगाए जाएंगे। वन विभाग ने बजट के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा है, और फंड मिलते ही पौधारोपण शुरू होगा। इसके अलावा, NHAI को कृत्रिम नॉइस बैरियर लगाने के लिए कहा गया है, जो शोर को और कम करेगा।
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क्यों जरूरी है यह कदम?
नवाबगंज पक्षी अभयारण्य कई दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों का घर है। ध्वनि प्रदूषण से इनके प्रजनन, व्यवहार और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इस क्षेत्र की जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो सकता है। NGT का यह कदम न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी एक मिसाल बनेगा।
आगे क्या?
NGT ने NHAI और UPPCB को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर तेजी से काम करें। अगली सुनवाई में NHAI को अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तावित उपाय कितने प्रभावी हैं। अगर ये कदम सफल रहे, तो नवाबगंज पक्षी अभयारण्य में शांति बहाल होगी और पक्षियों का यह आश्रय स्थल फिर से सुरक्षित हो सकेगा।



