नई दिल्ली: दुनिया भर में एंटीबायोटिक्स के बिना इलाज संभव न होने वाले संक्रमणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में वैश्विक स्तर पर हर छह बैक्टीरियल संक्रमणों में से एक अब दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुका है। यह आंकड़ा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे को रेखांकित करता है, जो स्वास्थ्य प्रणालियों को चरमरा रहा है। 18 से 24 नवंबर तक चल रहे विश्व AMR जागरूकता सप्ताह के दौरान, विशेषज्ञों ने जोर दिया कि यह समय है जब हम सभी को दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। अन्यथा, आने वाले दशकों में साधारण संक्रमण भी घातक साबित हो सकते हैं।
AMR: अदृश्य दुश्मन जो दवाओं को बेअसर बना रहा है
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, या AMR, वह स्थिति है जब बैक्टीरिया, वायरस, कवक या परजीवी खुद को बदल लेते हैं और पारंपरिक दवाएं उन पर असरहीन हो जाती हैं। नतीजा? एक मामूली घाव का संक्रमण जानलेवा बन सकता है, सर्जरी जोखिम भरी हो जाती है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। WHO के अनुसार, यह समस्या इसलिए विकराल हो रही है क्योंकि एंटीबायोटिक्स का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल चाहे मनुष्यों में हो या पशुओं में इन रोगाणुओं को मजबूत बना रहा है। जागरूकता सप्ताह का मकसद यही है: डॉक्टरों, किसानों, पशु चिकित्सकों और आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाना कि दवाओं की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
चौंकाने वाले आंकड़े: मौतों और ट्रेंड्स की सच्चाई
WHO की ग्लोबल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सर्विलांस रिपोर्ट (GLASS) 2025 ने 23 मिलियन से ज्यादा संक्रमणों के डेटा का विश्लेषण किया है। इसमें सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच प्रमुख रोगाणु-दवा जोड़ियों में 40 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में प्रतिरोध की दर बढ़ी है। कई संक्रमणों में यह वृद्धि सालाना 5 से 15 प्रतिशत तक रही। वैश्विक स्तर पर, 2019 में AMR ने सीधे 12.7 लाख मौतों का कारण बना, जबकि इससे जुड़ी कुल 49.5 लाख मौतें हुईं। ये आंकड़े न सिर्फ स्वास्थ्य संकट दर्शाते हैं, बल्कि विकासशील देशों में गरीबी और असमानता को और गहरा करने वाले कारकों को भी उजागर करते हैं। रिपोर्ट में 93 संक्रमण-रोगाणु-दवा संयोजनों के वैश्विक और क्षेत्रीय अनुमान दिए गए हैं, साथ ही 16 महत्वपूर्ण जोड़ियों पर 2018-2023 की ट्रेंडिंग पर नजर।
आर्थिक त्रासदी: ट्रिलियन डॉलर का बोझ
AMR का असर सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं। विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, 2030 तक यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को सालाना 1 से 3.4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान पहुंचा सकता है। 2050 तक स्वास्थ्य क्षेत्र में अतिरिक्त खर्च एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कारण साफ हैं कि लंबे इलाज, महंगी वैकल्पिक दवाएं, ज्यादा अस्पताल प्रवेश और उत्पादकता में गिरावट। भारत जैसे देशों में, जहां कृषि और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में एंटीबायोटिक्स का व्यापक उपयोग होता है, यह बोझ और भारी पड़ रहा है।
2025 की थीम: तत्काल कार्रवाई का आह्वान
इस साल AMR जागरूकता सप्ताह की थीम है अभी कदम बढ़ाएं: आज की सुरक्षा, भविष्य की रक्षा। यह 2024 के संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय सम्मेलन की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को अमल में लाने का संदेश देती है। WHO सभी देशों से अपील कर रहा है कि वे वादों को कार्रवाई में बदलें। प्रमुख सुझावों में शामिल हैं:
- AMR निगरानी प्रणालियों को मजबूत बनाना और डेटा संग्रह में सुधार।
- सस्ती, गुणवत्ता वाली दवाओं और डायग्नोस्टिक टूल्स की पहुंच बढ़ाना।
- नए एंटीबायोटिक्स और वैक्सीन पर रिसर्च को गति देना।
- स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण क्षेत्रों में लचीली प्रणालियां विकसित करना।
- ये कदम न केवल संक्रमणों को नियंत्रित करेंगे, बल्कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करेंगे।



