नयी दिल्ली: प्रकृति के संरक्षण और उसके संसाधनों से होने वाली आय को जमीन से जुड़े लोगों तक पहुँचाने की दिशा में राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने देश के 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को 45 लाख रुपये की ‘लाभ-साझाकरण’ राशि वितरित की है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
प्रमुख बिंदु
लाभार्थी: 10 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 90 से अधिक समितियां (बीएमसी)।
विशेष लाभ: आंध्र प्रदेश के 15 लाल चंदन किसानों को मिला आय का सीधा हिस्सा।
शामिल राज्य: दिल्ली, यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल, कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित अन्य।
संसाधन: सूक्ष्मजीवों, कीटों, मिट्टी और लाल चंदन जैसे जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से जुटाया गया फंड।
कुल उपलब्धि: अब तक कुल एबीएस (ABS) भुगतान ₹145 करोड़ के पार।
क्या है ‘लाभ-साझाकरण’ व्यवस्था?
जैव विविधता अधिनियम के तहत, जब कोई कंपनी भारत के जैविक संसाधनों (जैसे जड़ी-बूटी, सूक्ष्मजीव या कृषि उत्पाद) का उपयोग करके व्यावसायिक लाभ कमाती है, तो उस मुनाफे का एक निश्चित हिस्सा उन स्थानीय समुदायों को देना होता है जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं। इसे ही ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग’ (एबीएस) कहा जाता है। एनबीए इसी व्यवस्था के जरिए कंपनियों से मिलने वाली राशि को ग्राम सभाओं और शहरी निकायों तक पहुँचाता है।
वैज्ञानिक नवाचार और ग्रामीण आय का संगम
इस बार वितरित की गई राशि मिट्टी और पानी में पाए जाने वाले उन सूक्ष्मजीवों और कीटों के व्यावसायिक उपयोग से मिली है, जिनका इस्तेमाल वैज्ञानिक नवाचारों और दवाओं में किया गया। इसमें आंध्र प्रदेश के लाल चंदन किसानों का भी बड़ा योगदान है। यह राशि दर्शाती है कि कैसे जैव-अर्थव्यवस्था स्थानीय आजीविका में सुधार ला सकती है।
जमीनी स्तर पर संरक्षण को प्रोत्साहन
एनबीए के इस प्रयास से गाँवों और शहरों में काम कर रही जैव विविधता प्रबंधन समितियों को अपने क्षेत्र के पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों के दस्तावेजीकरण (पीबीआर) के लिए प्रेरणा मिलेगी। प्राधिकरण ने हाल के वर्षों में ‘व्यापार सुगमता’ के लिए नियमों को सरल बनाया है ताकि अधिक से अधिक उद्योगों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा सके और संरक्षण के लिए फंड जुटाया जा सके। यह पहल कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्यों को पूरा करने में भारत की बड़ी भूमिका को रेखांकित करती है।



