नई दिल्ली। विश्व शौचालय दिवस (19 नवंबर 2025) पर जल शक्ति मंत्रालय ने देशभर में ‘हमारा शौचालय, हमारा भविष्य’ नाम का खास अभियान शुरू किया। यह अभियान 19 नवंबर से मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इसका मकसद है कि गांवों में बने शौचालय हमेशा इस्तेमाल के लायक रहें, टूट-फूट ठीक हो और लोग उन्हें साफ-सुथरा व सुंदर बनाकर रखें।
पुराने शौचालयों को नई जिंदगी
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के पहले चरण में 2014 से 2019 तक 11 करोड़ से ज्यादा घरेलू शौचालय बनाए गए थे। अब दूसरे चरण में ध्यान इस बात पर है कि ये शौचालय हमेशा काम करते रहें। इस अभियान में हर गांव में सामुदायिक शौचालय (CSC) और निजी शौचालयों (IHHL) की जांच होगी। जहां टंकी लीक कर रही हो, दरवाजा टूटा हो या पाइप जाम हो, सब ठीक किया जाएगा।
साफ-सफाई के साथ सुंदरता भी
अभियान में सिर्फ मरम्मत ही नहीं, शौचालयों को रंग-रोगन और सजावट से सुंदर बनाने की मुहिम भी चलेगी। दीवारों पर स्वच्छता के संदेश लिखे जाएंगे, फूलों के गमले लगेंगे ताकि लोग शौचालय को बोझ न समझें, बल्कि गर्व की चीज मानें।
स्कूलों में जागरूकता, बच्चों से बड़ा संदेश
स्कूलों में बच्चे नाटक, रैली और चित्रकला प्रतियोगिता के जरिए लोगों को बताएंगे कि गंदा शौचालय बीमारी लाता है और साफ शौचालय स्वास्थ्य व सम्मान देता है। बच्चों को मल-जल को सुरक्षित तरीके से निपटाने और जलवायु के हिसाब से मजबूत शौचालय बनाने की जानकारी भी दी जाएगी।
गांव-गांव में जनभागीदारी
हर ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिले को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। NSS, NCC, युवा मंडल, पद्म पुरस्कार विजेता, पूर्व सैनिक और गांव के बुजुर्गों को जोड़ा जा रहा है। स्वच्छता कर्मियों का सम्मान होगा और जिनके पास अभी शौचालय नहीं है, उन्हें नए शौचालय की स्वीकृति पत्र बांटे जाएंगे।
खुले में शौच से पूरी तरह मुक्ति
भारत ने पहले ही सभी गांव को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित कर दिया है। अब लक्ष्य है ‘ODF प्लस’ यानी शौचालय सिर्फ बने ही नहीं, हमेशा साफ और इस्तेमाल में रहें। मंत्रालय का मानना है कि अगर शौचालय अच्छी हालत में रहेगा तो आने वाली पीढ़ी भी बीमारियों से बचेगी और स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा।
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10 दिसंबर को भव्य समापन
मानवाधिकार दिवस पर यह अभियान समाप्त होगा। उम्मीद है कि 22 दिन में लाखों शौचालय न केवल ठीक हो जाएंगे, बल्कि गांव वाले इन्हें अपनी संपत्ति की तरह संभालने लगेंगे। जल शक्ति मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि इस अभियान को उत्सव की तरह मनाए ताकि स्वच्छता हर दिल में बस जाए।



