नई दिल्ली: बिहार में साढ़े आठ दशक बाद सीडब्ल्यूसी की बैठक हो रही है। यह विस्तारित बैठक है, जिसमें कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी अकेले ही CWC में शामिल होने पहुंचे। उनके साथ उनकी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी इस बैठक में शामिल नहीं हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदाकत आश्रम में झंडा फहराकर बैठक का शुभारंभ किया। वहीं भाजपा ने इस बैठक पर तीखा हमला बोलते हुए इसे महज चुनावी स्टंट बताया है
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने CWC बैठक में कहा कि पार्टी के नेता और पदाधिकारी ऐसे समय मिल रहे हैं जब भारत अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो समस्याएं हैं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की कूटनीतिक विफलता का नतीजा हैं। जिन दोस्तों पर प्रधानमंत्री मेरे दोस्त कहकर गर्व करते हैं, वही आज भारत को कई परेशानियों में डाल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी आर्थिक और विदेश नीति के मामले के फेल हो गए। इसका खामियाजा जनता को भुगताना पड़ रहा है। बिहार चुनाव पर उन्होंने कहा कि भाजपा अब नीतीश कुमार को बोझ मान रही है।
CWC की बैठक को लेकर सियासत तेज
बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा के चुनाव होने है। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी हैं। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी अपने चरम पर है। ऐसे में बुधवार को पहली बार बिहार में हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक को लेकर भी सियासत भी तेज हो गई है। भाजपा ने इस बैठक पर तीखा हमला बोलते हुए इसे महज चुनावी स्टंट बताया है और कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाए हैं। भाजपा का कहना है कि यह बैठक कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे वह महागठबंधन में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इसे तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के सपने का अंत बताया और कहा कि कांग्रेस अब राजद पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
कांग्रेस नेताओं का जुटान दिखावा

बिहार भाजपा प्रवक्ता का तंज बिहार भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने पटना के सदाक़त आश्रम में कांग्रेस की CWC की बैठक पर तंज कसा। उन्होंने कहा 85 वर्षों के बाद पटना के सदाकत आश्रम में कांग्रेस की कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक के नाम पर पार्टी के आला नेताओं के जुटान से कांग्रेस को कोई लाभ होने वाला नहीं है। महागठबंधन में शामिल अन्य दलों के नेताओं ने दूरी बना रखी है। कांग्रेस के नेताओं के स्वागत के लिए भी कोई बड़ा नेता एयरपोर्ट नहीं गया। तेजस्वी यादव भी अचानक बीमार पड़ गए। दरअसल कांग्रेस की महारानी और युवराजत समेत अन्य नेताओं का जमघट मात्र दिखावा है। असल उद्देश्य राजग को आईना दिखाकर खुद को बड़ा भाई का तमगा लेना है। खेल तो अब होगा, जब गठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर नए सिरे से किचकिच होगी। तमासा होना बाकी है। आगे-आगे देखिये होता क्या है।



