लखनऊ। उन्नाव रेप मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने अपील लंबित रहने तक उनकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए सशर्त जमानत दे दी है। निचली अदालत ने दिसंबर 2019 में सेंगर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
15 जनवरी को अगली सुनवाई
जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने यह आदेश पारित किया। अदालत ने सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही इतनी ही राशि के तीन जमानतदार पेश करने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी।
इन शर्तों के साथ मिली जमानत
अदालत ने जमानत देते हुए कड़ी शर्तें लगाई हैं। सेंगर पीड़िता से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे और दिल्ली में ही रहेंगे। वे पीड़िता को किसी भी तरह से धमकी नहीं देंगे। अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा और हर सोमवार को पुलिस के समक्ष हाजिरी देनी होगी। किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकेगी। साथ ही, यदि भविष्य में सजा बरकरार रहती है तो शेष सजा भुगतने के लिए उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत होना होगा।
दिल्ली में हो रही सुनवाई
गौरतलब है कि उन्नाव बलात्कार से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई रोजाना करने और तय समय में पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से संबंधित मामलों की सुनवाई दिल्ली में हो रही है। निचली अदालत ने सजा सुनाते समय सीबीआई को पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया था।
क्या है उन्नाव रेप मामला
यह मामला वर्ष 2017 का है, जब उन्नाव की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए पीड़िता ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया था। इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत और फिर पीड़िता की कार के संदिग्ध हादसे ने मामले को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था। निचली अदालत ने सेंगर के अपराधों को गंभीर मानते हुए सजा में किसी भी तरह की रियायत देने से इनकार किया था।



